हड़ताल के कारण 44वें दिन भी मनरेगा कार्य प्रभावित, पलायन बनी विवशता

स्थायीकरण, बकाया मानदेय और अन्य मांगों को लेकर कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं

स्थायीकरण, बकाया मानदेय और अन्य मांगों को लेकर कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं प्रतिनिधि, बारियातू. मनरेगा कर्मियों की हड़ताल मंगलवार को 44वें दिन भी जारी रही. स्थायीकरण, बकाया मानदेय और अन्य मांगों को लेकर कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. इसके कारण प्रखंड में मनरेगा की सभी योजनाएं ठप हो गयी हैं. सबसे अधिक प्रभावित मजदूर हैं, जिन्हें रोजगार नहीं मिल रहा और वे पलायन के लिए मजबूर हो रहे हैं. 20 जनवरी से अब तक सात सप्ताह की मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ है. अनुमानतः दो करोड़ रुपये की मजदूरी बकाया है. मजदूर प्रखंड कार्यालयों का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं हो रहा. बागवानी, कुआं निर्माण, पीएम आवास, अबुआ आवास और टीसीबी जैसी योजनाएं प्रभावित हैं. देखरेख के अभाव में पौधे सूख रहे हैं और अधूरे कुएं बरसात में धंसने के खतरे में हैं. वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 1200 योजनाएं मनरेगा से ली गयी हैं, जिनमें 13,968 जॉब कार्डधारी और करीब 10,000 सक्रिय मजदूर शामिल हैं. हड़ताल से पहले बड़ी संख्या में मजदूर काम की मांग करते थे, जो अब लगभग शून्य हो गई है. 40 दिन काम करने के बावजूद मजदूरी नहीं मिली बीगन राम ने बताया कि 40 दिन काम करने के बावजूद मजदूरी नहीं मिली, जिससे परिवार का भरण-पोषण कठिन हो गया है. संगीता देवी ने कहा कि 24 दिन काम करने के बाद भी भुगतान नहीं हुआ. मजदूरी न मिलने से घर का जरूरी खर्च प्रभावित हो रहा है और पलायन की स्थिति बन रही है. हड़ताल से कार्य प्रभावित हो रहा है मनरेगा बीपीओ विक्की देवल ने कहा कि कर्मियों की हड़ताल से कार्य प्रभावित हो रहा है. पंचायत सेवकों को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है. फेस कैप्चर हाजिरी प्रणाली लागू होने से तकनीकी समस्याएं आ रही हैं, जिसके कारण मजदूरों का भुगतान फंसा हुआ है. समस्याओं के समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं और मजदूरों को हाजिरी बनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है.

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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