Koderma News: दवाओं की बढ़ती कीमतों पर बोले ज्ञान शंकर मजूमदार- गरीब, मजदूर और किसान सबसे ज्यादा प्रभावित

झुमरीतिलैया में आयोजित सेमिनार में ज्ञान शंकर मजूमदार ने दवाओं की कीमतों और मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के अधिकारों पर चर्चा की।

झुमरीतिलैया,कोडरमा : दवा महज बाजार में बिकने वाला उत्पाद नहीं, बल्कि मरीज के जीवन से जुड़ी जरूरत है. दवाओं की बढ़ती कीमतों का सबसे अधिक असर गरीब, मजदूर, किसान और निम्न-मध्यम वर्ग पर पड़ रहा है. स्वास्थ्य और दवा को मुनाफे की बाजार व्यवस्था से अलग कर जनहित और आम आदमी के अधिकार के नजरिए से देखने की जरूरत है. उक्त बातें सीटू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ज्ञान शंकर मजूमदार ने कहीं. वे बीएसएसआर (मेडिकल रिप्रेजेन्टेटिव) झुमरीतिलैया इकाई की ओर से ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति और दवाओं की कीमतें’ विषय पर आयोजित सेमिनार को संबोधित कर रहे थे.

दवाओं की कीमत में जनहित को प्राथमिकता देने की मांग

सेमिनार में स्वास्थ्य नीति, दवाओं की बढ़ती कीमतों, सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था तथा मेडिकल रिप्रेजेन्टेटेटिव के श्रमिक अधिकारों पर चर्चा हुई. ज्ञान शंकर मजूमदार ने कहा कि आवश्यक दवाओं की कीमत तय करते समय उत्पादन लागत, आम जनता की क्रय क्षमता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए. उन्होंने वर्ष 2014 के बाद दवाओं की कीमत निर्धारण व्यवस्था में लागत आधारित मूल्य निर्धारण से बाजार आधारित मूल्य निर्धारण की ओर हुए बदलाव तथा दवाओं पर लगने वाले करों पर सवाल उठाया.

उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ाने के बजाय उन्हें सस्ती, गुणवत्तापूर्ण और जीवनरक्षक दवाएं उपलब्ध कराये.

मेडिकल रिप्रेजेन्टेटिव को मिले श्रमिक अधिकार

ज्ञान शंकर मजूमदार ने कहा कि मेडिकल रिप्रेजेन्टेटिव केवल बिक्री का लक्ष्य पूरा करने वाली मशीन नहीं, बल्कि श्रमिक हैं. उन्हें सम्मानजनक वेतन, नौकरी की सुरक्षा, बेहतर कार्य परिस्थितियां, यात्रा एवं दैनिक भत्ता, भविष्य निधि, उपदान, बीमा और चिकित्सा सुविधा सहित सामाजिक सुरक्षा लाभ मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ते बिक्री लक्ष्य, अत्यधिक कार्यभार, यात्रा खर्च, मानसिक दबाव और नौकरी की असुरक्षा के कारण वे कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं.

सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने पर जोर

बीएसएसआर झुमरीतिलैया इकाई के अध्यक्ष सुनील कुमार गुप्ता ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधा हर नागरिक का अधिकार है. सरकारी अस्पतालों और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पर्याप्त बजट और संसाधन उपलब्ध कराना जरूरी है. इकाई के सचिव दिलीप सिन्हा ने कहा कि मरीजों को सस्ती दवा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा तथा मेडिकल रिप्रेजेन्टेटिव को सम्मानजनक रोजगार दिलाने के लिए व्यापक जनजागरण चलाया जायेगा.

1983 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति का भी उल्लेख

सेमिनार में वर्ष 1983 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति का उल्लेख करते हुए सार्वभौमिक और मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को प्राथमिकता देने की मांग की गयी. वक्ताओं ने स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ती निजी भागीदारी और बाजार आधारित व्यवस्था पर चिंता जतायी. बैठक में किसान सभा के राज्य अध्यक्ष असीम सरकार तथा भारत ज्ञान विज्ञान समिति के अध्यक्ष राम रतन अवध्या ने भी विचार रखे.

मौके पर सिकंदर कुमार, मंटू कुमार वर्णवाल, पंकज पांडेय, इन्द्रजीत सिंह, सुमन कुमार, अमित कुमार, अभिजीत कुमार शर्मा, रमेश्वर पंडित, मुकेश कुमार, राजू कुमार, मोहम्मद गुलाब हसन, पंकज कुमार मोदी, मुन्ना वर्णवाल, नितेश रंजन, ज्ञानदीप कुमार, विक्की कुमार, श्रीकांत, मनोज वर्णवाल, तन्मय, अमित कुमार, बबलू कुमार, अमित आनंद, सन्नी मोदी, मृणाल गौतम आदि मौजूद

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Rajesh

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >