सतगावां, कोडरमा : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सतगावां में सरकारी दवाइयों के रखे-रखे एक्सपायर होने और उन्हें अस्पताल परिसर के पीछे मिट्टी व कचरे के ढेर में दबाये जाने का मामला सामने आया है. एक ओर ग्रामीण और गरीब मरीज इलाज और दवा के लिए परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन की कथित लापरवाही से बड़ी मात्रा में सरकारी दवाइयां उपयोग से बाहर हो गयीं.
कचरे में दबाई गयी दवाइयों में कई दवाएं जनवरी 2025 से मार्च 2025 के बीच एक्सपायर हुई हैं. आरोप है कि मरीजों के बीच वितरण करने के बजाय इन दवाइयों को गोदाम में रखा गया, जहां समय बीतने के साथ वे एक्सपायर हो गयीं. इसके बाद उन्हें अस्पताल परिसर में ही मिट्टी और कचरे के नीचे दबा दिया गया.
कई तरह की दवाएं मिलीं
कचरे में दबाई गयी दवाइयों में इंजेक्शन, सालबुटामोल 100 टैबलेट, एस्टोमेट एक्सआर 1000 टैबलेट, अल्बेंडाजोल सिरप, काडीजरेक्स फोर्ट, मेटलॉक एक्सएल 25 टैबलेट, नॉल एम सिरप, फोलिक एसिड टैबलेट, किट रैपिड डायग्नोस्टिक्स टेस्ट और डाइएथिलकार्बामाजिन सिट्रेट 100 टैबलेट समेत अन्य दवाएं शामिल हैं. इनकी कुल कीमत लाखों रुपये होने की बात कही जा रही है.
दवाइयों को एक्सपायरी की कगार तक पहुंचने देने के पीछे प्रशासनिक लापरवाही के साथ अन्य अनियमितताओं की भी आशंका जतायी जा रही है. सूत्रों के अनुसार, नयी दवाओं की खरीद के बाद पुरानी दवाओं को कागजों में खपाने का प्रयास किया जाता है. हालांकि, इस संबंध में किसी अधिकारी की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गयी है.
पहले भी उठते रहे हैं सवाल
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सतगावां पहले भी जननी सुरक्षा योजना और दवा वितरण में कथित अनियमितताओं को लेकर चर्चा में रहा है. ताजा मामले ने अस्पताल में सरकारी दवाओं के भंडारण और वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिये हैं.
मामले में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुरेश राम से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया. उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दिनों से दवा वितरण का काम अजय कुमार और प्रधान लिपिक राजीव रंजन देख रहे थे, जबकि दवा खरीद की जिम्मेदारी बीपीएम के पास थी. प्रधान लिपिक राजीव रंजन से मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका.
