एसपौंड नहीं बना, तो बंद हो सकता है बांझेडीह पावर प्लांट

500-500 की दो यूनिट में एक यूनिट बंद, दूसरे का भी हाल-बेहाल सीएसआर ने नौ वर्ष में खर्च किये 15 करोड़ रुपये जयनगर : बांझेडीह पावर प्लांट के एसपौंड निर्माण में रोज आ रही नयी बाधा से डीवीसी प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ गयी है. करियावां के ग्रामीण कुछ मांगें मानने के बाद भी ग्रामीण एसपौंड […]

500-500 की दो यूनिट में एक यूनिट बंद, दूसरे का भी हाल-बेहाल
सीएसआर ने नौ वर्ष में खर्च किये 15 करोड़ रुपये
जयनगर : बांझेडीह पावर प्लांट के एसपौंड निर्माण में रोज आ रही नयी बाधा से डीवीसी प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ गयी है. करियावां के ग्रामीण कुछ मांगें मानने के बाद भी ग्रामीण एसपौंड निर्माण कार्य का विरोध कर रहे हैं. ज्ञात हो कि डीवीसी द्वारा 500-500 मेगावाट क्षमता बिजली उत्पादन की दो यूनिट बांझेडीह में लगी हैं, जिसमें एक यूनिट बंद है और चालू दूसरी यूनिट में भी क्षमता के अनुरूप विद्युत उत्पादन नहीं हो रहा है. इससे प्रबंधन को प्रतिमाह 53 करोड़ का घाटा हो रहा है.
बुधवार को परियोजना प्रमुख सह डीवीसी के मुख्य अभियंता एमसी मिश्रा ने बांझेडीह के सभागार में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि एसपौंड में एक दिन काम लगाने में एक लाख रुपये खर्च होता है. उन्होंने बताया कि करियावां की ग्रामीणों की मांगे व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुरूप प्रबंधन ने अब अधिगृहित 527 एकड़ जमीन में से 300 एकड़ में एसपौंड बनाने का निर्णय लिया है. मगर ग्रामीण अब भी विरोध कर रहे हैं. यदि शीघ्र एसपौंड नहीं बना, तो इस पावर प्लांट को बंद कर देना होगा. प्लांट के बंद होने से हजारों लोग बेरोजगार हो जायेंगे. प्लांट के बाहर बसे बाजार भी बंद हो जायेंगे.
उन्होंने बताया कि करियावां के ग्रामीण सरकार व जिला प्रशासन की बात भी नहीं मान रहे है. डीवीसी द्वारा बार-बार अपील करने के बाद भी उनका विरोध जारी है. उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट जिला प्रशासन को ग्रामीणों को देना चाहिए था, जो नहीं दिया गया. प्रबंधन भी रिपोर्ट को ग्रामीणों के बीच सार्वजनिक करने को तैयार हैं. ग्रामीण एसपौंड निर्माण में सहयोग करें. प्लांट व क्षेत्र के विकास में बाधक नहीं सहभागी बनें. उन्होंने बताया कि एसपौंड की वैकल्पिक व्यवस्था करने में 33 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं.
अस्थायी रहने के कारण प्रदूषण दिखा है. मगर स्थायी एसपौंड बनाने के बाद प्रदूषण नियंत्रण के सभी मानक पूरे किये जायेंगे. 300 एकड़ में एसपौंड बनने के बाद शेष जमीन पर नहर बनाया जायेगा व उसमें फव्वारा लगाया जायेगा. वहीं पौधरोपण कर ग्रीन बेल्ट बनाया जायेगा. मगर यह तभी होगा, जब एसपौंड बनेगा. बताया कि करियावां के लोगों ने काम रोकने के लिए न्यायालय में पीआइएल दाखिल किया था, जिससे न्यायालय ने खारिज कर दिया. इसके बावजूद ग्रामीणों का विरोध जारी है.
उन्होंने बताया कि वर्ष 2008 से अबतक पहले एसआइपी व अभी सीएसआर द्वारा विस्थापित गांवों में 15 करोड़ रुपये खर्च किये गये है. मंगलवार को 300 एकड़ में एसपौंड निर्माण के कार्य को लेकर सर्वे करने पहुंचे वेल कंपनी के डीजीएम जयंतो घोष, मुख्य अभियंता एमसी मिश्रा व अन्य पदाधिकारी को करियावां के ग्रामीणों ने कलेश्वर सिंह के नेतृत्व मे सर्वे करने से रोक दिया. अब उनकी मांग है कि एमपी, एमएलए की उपस्थिति में पहले ग्रामीणों से वार्ता हों. फिलहाल काम बंद है. ऐसे में इस परियोजना को ग्रहण लगने की संभावना बढ़ गयी है. मौके पर मुख्य अभियंता अनंत चक्रवर्ती, डीजीएम मधुकांत झा, हिंदी अधिकारी जितेंद्र झा मौजूद थे.

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