क्या IRGC के नेवी कमांडर अलीरेजा तांगसिरी को इजरायल ने मार गिराया है?

Alireza Tangsiri : ईरान युद्ध में कड़ा रुख अख्तियार कर होर्मुज स्ट्रेट को बाधित करने वाले IRGC के नेवी कमांडर अलीरेजा तांगसिरी की मौत की खबर सामने आई है. हालांकि अलीरेजा तांगसिरी की मौत की पुष्टि ईरान ने नहीं की है. इजरायली मीडिया ने शीर्ष अधिकारियों के हवाले से यह दावा किया है कि अलीरेजा तांगसिरी को मार गिराया गया है.

Alireza Tangsiri :  IRGC (Islamic Revolutionary Guard Corps) नेवी के कमांडर अलीरेजा तांगसिरी को मार गिराने का दावा इजरायली मीडिया ने किया है. अगर अलीरेजा की मौत एक सच्चाई है, तो यह ईरान के लिए बहुत बड़ा झटका है,क्योंकि अलीरेजा खाड़ी क्षेत्र में ईरान के प्रमुख रणनीतिकार थे.

इजरायली मीडिया ने अलीरेजा को मारने का दावा किया

इजरायली मीडिया ने अधिकारियों के हवाले से यह दावा किया है कि  IRGC नेवी के कमांडर अलीरेजा तांगसिरी को बंदर अब्बास में एक स्ट्राइक के दौरान मार गिराया गया है. इजरायली मीडिया ने यह भी बताया है कि होर्मुज स्ट्रेट को बंद कराने में अलीरेजा तांगसिरी की अहम भूमिका थी. 

कौन हैं अलीरेजा तांगसिरी?

अलीरेजा तांगसिरी  ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना के प्रमुख (Commander) हैं. उनके ऊपर खाड़ी क्षेत्र में ईरान की समुद्री रणनीति बनाने की अहम जिम्मेदारी है, जिसमें फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट का क्षेत्र प्रमुख है. उन्हें ईरान का उग्र चेहरा माना जाता है. अलीरेजा तांगसिरी ने बार–बार यह बयान दिया था कि अगर जरूरत पड़ी तो होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह बंद किया जा सकता है.

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ईरान के 50 से अधिक शीर्ष अधिकारियों की हुई युद्ध में मौत

28 फरवरी से शुरू हुए ईरान युद्ध में अबतक 50 से अधिक शीर्ष ईरानी अधिकारियों की मौत हो चुकी है. हालांकि इन सब की पुष्टि नहीं हुई है. ईरान पर हुए हमलों में अबतक जिन सबसे शीर्ष अधिकारियों की मौत हुई, उनमें उनके सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई सर्वप्रमुख हैं. उसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी और इंटेलिजेंस के मंत्री इस्माइल खतीब की भी इजरायली हमले में मौत हुई है.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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