देश में ईंधन संकट की आहट या अफवाह? जानिए क्या है भारत की असली स्थिति

Oil Crisis : क्या भारत अगले कुछ दिनों में गंभीर ऊर्जा संकट का सामना करने वाला है और लोगों को रसोई में गैस की बजाय कोयले के चूल्हे या फिर कोई और विकल्प तलाश कर खाना बनाना पड़ेगा? यह एक ऐसी आशंका है, जो पूरे देश में अफवाह के रूप में फैल चुकी है और आम जनता इसे सच भी मान रही है. खाड़ी युद्ध के दौरान जो स्थिति बनी है, उससे इस सोच का विकसित होना स्वाभाविक है.

Oil Crisis : खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष के बीच देश में पेट्रोल और गैस की कमी की खबरों के बीच अफवाहों का बाजार गर्म है और आम नागरिक रात–रात भर गैस लेने के लेने के लिए लाइन लगा रहा है. भारत का 80% तेल होर्मुज स्ट्रेट से आता है और इस समुद्री मार्ग पर जहाजों के आने–जाने में बाधा उत्पन्न हो गई है, जिसकी वजह से देश में लोगों को इस बात का भय सता रहा है कि कहीं उन्हें एक बार फिर गैस चूल्हे से कोयले के चूल्हे के युग में ना लौटना पड़ा, आखिर लोगों की इस आशंका की सच्चाई क्या है, इस बारे में सरकार ने विस्तार से स्पष्टीकरण दिया है.


मिडिल ईस्ट में युद्ध की वजह से समस्या क्या है?

मिडिल ईस्ट में 28 फरवरी से युद्ध जारी है. वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की सप्लाई काफी हद तक पश्चिम एशिया पर निर्भर है. होर्मुज स्ट्रेट से 20प्रतिशत तेल की सप्लाई होती है, लेकिन इस मार्ग से सप्लाई बंद है, जिसकी वजह से तेल संकट वैश्विक स्तर पर उभर रहा है. भारत में भी तेल संकट की आशंका है और लोगों ने एहतियात बरतते हुए गैस को स्टोर करने के लिए इसकी खरीद बढ़ा दी है. इस स्थिति में डिमांड के अनुसार सप्लाई नहीं हो रहा है और एक अनचाहा डर लोगों के मन में बैठ गया है और एक अस्थायी ऊर्जा संकट नजर आ रहा है.


दो महीने का स्टाॅक सुरक्षित

26 मार्च को सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि डरने की कोई जरूरत नहीं है. देश में ऊर्जा संकट उत्पन्न नहीं होगा. सरकार के पास फिलहाल लगभग 60 दिनों का तेल और ईंधन स्टॉक उपलब्ध है. सरकार के पास कुल भंडारण क्षमता लगभग 74 दिनों की है. इस स्टॉक में कच्चा तेल, रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद और रणनीतिक भंडार शामिल हैं, जिन्हें भूमिगत भंडारण में रखा जाता है. इसके साथ ही, भारतीय तेल कंपनियों ने अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल की खरीद और उसे मंगाने का पूरा इंतजाम कर लिया है. इसका यह स्पष्ट अर्थ है कि भारत के सामने अभी ऊर्जा संकट नहीं है.

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एलपीजी को लेकर सरकार ने क्या कहा है?

एलपीजी की स्थिति के बारे में सरकार की ओर से बताया गया है कि लगभग 8 लाख टन एलपीजी सुरक्षित है. इसका अर्थ यह हुआ कि एक महीने बिना किसी बाधा के सप्लाई जारी रहेगी. साथ ही सरकार एलपीजी को आयात भी कर रही है. पीएनजी की सप्लाई को भी सरकार सुनिश्चित कर रही है, इसलिए घबराने जैसी कोई स्थिति फिलहाल नजर नहीं आती है.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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