फलों व सब्जियों के दाम में बेहताशा वृद्धि, गरीबों की थाली से
जयनगर : एक समय था जब मध्यमवर्गीय लोग कहते थे कि महंगाई है, तो क्या हुआ. दाल रोटी व चोखा भात खाकर गुजर कर लेंगे. मगर आज की महंगाई ने इस जुमले को गलत साबित कर दिया है. आज स्थिति यह है कि गरीबों की थाली से महंगाई के कारण दाल गायब हो चुका है.
सरकार चावल देती है, पर आलू के बढ़ते दाम के कारण भात तो है, पर चोखा गायब हो गया. हरी मिर्च का दाम सुन कर ही तीखा पन का एहसास होने लगता है.
महंगाई से गरीबों को पेट भरना मुश्किल है, स्वाद दूर की बात
: बढ़ती महंगाई पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए डंडाडीह निवासी सोनिया देवी ने कहा कि महंगाई के आलम में अच्छे दिन हवा हो गये है. जिस महंगाई के कारण जनता ने सरकार बदली, वहीं महंगाई फिर फन उठाने लगी है.
पपरामो निवासी उमा देवी कहती है कि सीमित आय वाले घरों के रसोई का बजट बिगड़ गया है. समझ में नहींआता की कैसे घर चलायें. चुटियारो निवासी मीना साव ने कहा कि महंगाई ने तो भोजन का जायका ही बिगाड़ दिया है. महंगाई में गरीबों को पेट भरना मुश्किल है, स्वाद तो दूर की बात है.
