प्रतिनिधियों को कमजोर कर रही सरकार : शालिनी

नौ सूत्री मांगों को लेकर पंचायत जनप्रतिनिधियों का धरना, जुलूस बजट का 25 प्रतिशत फंड देने की उठायी मांग सम्मानजनक वेतन भी दे सरकार कोडरमा बाजार : पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत नवनिर्वाचित पंचायत जनप्रतिनिधियों ने अधिकारों को लेकर बुधवार को आवाज बुलंद किया. त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधि संघ के बैनर तले जिला समाहरणालय के समक्ष […]

नौ सूत्री मांगों को लेकर पंचायत जनप्रतिनिधियों का धरना, जुलूस
बजट का 25 प्रतिशत फंड देने की उठायी मांग
सम्मानजनक वेतन भी दे सरकार
कोडरमा बाजार : पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत नवनिर्वाचित पंचायत जनप्रतिनिधियों ने अधिकारों को लेकर बुधवार को आवाज बुलंद किया. त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधि संघ के बैनर तले जिला समाहरणालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया गया.
अध्यक्षता जिप अध्यक्ष शालिनी गुप्ता व संचालन जिप सदस्य महादेव राम व पंसस रविंद्र शांडिल्य ने संयुक्त रूप से किया. नौ सूत्री मांगों को लेकर दिये गये धरना में त्रिस्तरीय पंचायत जनप्रतिनिधि जिप सदस्य, पंचायत समिति व अन्य शामिल होकर ग्रामसभा को पूर्ण अधिकार देने की मांग की. धरना से पूर्व कोडरमा बाजार से लेकर समाहरणालय तक जुलूस निकाला गया. जुलूस का नेतृत्व जिला परिषद संघ झारखंड राज्य की अध्यक्ष सह जिप अध्यक्ष शालिनी गुप्ता कर रही थी.
इस दौरान पंचायत जनप्रतिनिधियों को अधिकार देना होगा, बजट का 25 प्रतिशत फंड देना होगा आदि नारे लगाये जा रहे थे. जुलूस धरना स्थल पर पहुंच सभा में तब्दील हो गयी. सभा में जिप अध्यक्ष शालिनी गुप्ता ने कहा कि सरकार पंचायत जनप्रतिनिधियों को उनका अधिकार नहीं देकर कमजोर करना चाहती है, ताकि पंचायत जनप्रतिनिधि सांसद व विधायक का चक्कर लगाने को विवश हों.
उन्होंने कहा कि केरल समेत अन्य राज्यों में पंचायत जनप्रतिनिधियों को कई अधिकार दिये गये हैं, पर झारखंड में चुने गये प्रतिनिधियों को नजर अंदाज कर उपेक्षित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि 25 जून को राज्यपाल के समक्ष सभी 24 जिलों के पंचायत जनप्रतिनिधि एक दिवसीय उपवास कार्यक्रम में शामिल होंगे. उन्होंने कहा कि अब तक झारखंड में राज्य वित्त आयोग का गठन नहीं हुआ है. जिप सदस्य महादेव राम व अन्य वक्ताओं ने कहा कि गांव की सरकार को राज्य सरकार संपूर्ण अधिकार नहीं देना चाहती है. हमें अपना अधिकार लड़कर प्राप्त करना होगा.
धन्यवाद ज्ञापन जिप सदस्य पवन सिंह ने किया. धरना को जिप उपाध्यक्ष निर्मला देवी, जिप सदस्य अमृता सिंह, शांति प्रिया, राजकुमार यादव, रेखा देवी, अमिता यादव, भुनेश्वर राम, कैलाश यादव, प्रमुख सत्यनारायण यादव, लीलावती देवी, सावित्री देवी, अनिता कुमारी, उप प्रमुख समसुल खान, बृजनंदन यादव, बीरेंद्र यादव, विजय सिंह, सुरेश साव, धनंजय यादव, महेंद्र यादव, अजय चौधरी, भीम कुमार यादव, अर्चना कुमारी, जयप्रकाश राम, रवींद्र शांडिल्य, गुलचंद पंडित, नारायण राम, बासुदेव साव, महेश महतो, विनोद यादव, प्रदीप सिंह, विंदा देवी, गिरधारी साव, महावीर यादव आदि ने भी संबोधित किया. धरना के बाद राज्यपाल के नाम ज्ञापन उपायुक्त को सौंपा गया.
राज्य सरकार व केंद्र सरकार पंचायत प्रतिनिधियों को तीनों स्तर पर जिला परिषद, पंचायत समिति, ग्राम पंचायत को विकास कार्य के लिए प्रति वर्ष फंड उपलब्ध कराये, ताकि विकास तेजी से हो सके. साथ ही 14वें वित्त अनुदान मद की राशि समानुपातिक क्रम में दिया जाये .
संविधान की 11वीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विशेषज्ञों पर शक्तियों का प्रत्यायोजन कर उनका अनुपालन जिला परिषद/पंचायत समिति/ग्राम पंचायत स्तर तक सुनिश्चित किया जाये.
डीआरडीए का विलय तो हुआ, पर किसी भी संचिका का संपादन डीआरडीए अध्यक्ष सह जिप अध्यक्ष से नहीं कराया जा रहा है, उपाध्यक्षों को भी संचिका के संपादन का अधिकार मिलना चाहिए. साथ ही सदस्यों को भी डीआरडीए में भी सदस्यता का आदेश जारी हो.
राज्यपाल के आदेश से अब तक 14 विभागों का हस्तांतरण किया गया है, पर राज्य सरकार इसी की अवहेलना कर रही है.
सभी प्रतिनिधियों को
सम्मानजनक वेतन.
भूमि संरक्षण विभाग द्वारा क्रियान्वित योजनाओं व तालाब जीर्णोद्धार की अनुशंसा में पंचायत प्रतिनिधियों को प्राथमिकता, जिला परिषद के अधीन सभी विभागों में अनुशंसा व अनुमोदन की शक्ति.
विभिन्न विभागों के बजट का कम से कम 25 प्रतिशत (केरल) की तर्ज पर उपलब्ध कराना. बिहार, पश्चिम बंगाल व केरल की तर्ज पर अधिकार. प्रखंड प्रमुखों को क्षेत्र भ्रमण के लिए वाहन की व्यवस्था.

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