तिलैया डैम में मछली व्यवसाय की आड़ में चल रहा है गोरखधंधा
कोडरमा बाजार : जिले में इन दिनों तस्करी का एक नया धंधा जोर-शोर से चल रहा है. लुप्त प्राय वन्य प्राणी कछुआ की तस्करी जिले में धड़ल्ले से की जा रही है. वहीं इसकी रोकथाम की जिम्मेवारी जिस विभाग पर है, वह मौन साधे हुए है. जानकारी के अनुसार जिले के चंदवारा प्रखंड अंतर्गत जामूखाड़ी के तिलैया डैम क्षेत्र में मत्स्य पालन से जुड़े कुछ लोगों द्वारा यह काम किया जा रहा है.
तिलैया डैम से मछली पकड़ कर उसका व्यवसाय करनेवाले कुछ लोग इस धंधे में शामिल हैं, जो मछली के साथ-साथ कछुआ को पकड़ कर उसकी तस्करी में लगे हुए है. मन मुताबिक दाम मिलने के कारण लुप्त प्राय प्रजाति कछुआ की तस्करी की जा रही है. सूत्र की मानें तो कछुआ का कोई दाम निश्चित नहीं है, बल्कि सामने वाले की जरूरत और कछुए की साइज पर दाम तय होता है. एक अनुमान के मुताबिक 500 से लेकर 1500 तक एक कछुए को काफी गुपचुप तरीके से बेचा जाता है.
आमतौर पर कछुए को पकड़ कर इसे बिहार राज्य के विभिन्न जिलों में मन मुताबिक दाम पर बेचा जा रहा है. इस मामले को लेकर नियम क्या है, इससे मत्स्य विभाग अनजान है, वहीं वन प्राणी आश्रयणी के अधिकारी इसे दंडनीय अपराध तो बताते हैं, पर इसे रोकने के लिए कोई ठोस योजना उनके पास नहीं है.
कछुआ की तस्करी दंडनीय अपराध : रेंजर
कोडरमा वन्य प्राणी प्रक्षेत्र के रेंजर प्रमोद कुमार ने कहा कि कछुआ एक लुप्त प्राय प्राणी है और यह वन्य प्राणी के श्रेणी में आते है. यदि इसकी खरीद-बिक्री हो रही है, तो यह एक दंडनीय अपराध है. पकड़े जाने पर वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत दो साल से लेकर 10 साल तक सजा का प्रावधान है.
