रेल लाइन पार करने के लिए जान हथेली पर
जयनगर : धनबाद-गया रेलखंड के हिरोडीह स्टेशन के पास बसा गांव रेभनाडीह के लोग अपने को टापू पर बसे होने महसूस करते है. उन्हें रेल सुविधा उपलब्ध कराने वाला रेलवे ही उनके लिए सिरदर्द बन गया है.
रेभनाडीह गांव के सामने पहले चार रेलवे लाइन बिछी थी, अब बांझेडीह कोयला ले जानेवाली एक लाइन और बढ़ गयी है. लूप लाइन व कोयला ढ़ोने वाली लाइन पर अक्सर कोयला लदी मालगाड़ी या खाली मालगाड़ी कभी-कभी घंटों तो कभी कई दिनों तक खड़ी रहती है, ऐसे में पैदल जानेवाले लोग जान जोखिम डाल कर ट्रेन के नीचे से लाइन पार करते हैं. ऐसे में कई मवेशी अब तक कट चुके हैं, वहीं कई लोग भी हड़बड़ी में पार करने में घायल हो चुके हैं. ज्ञात हो कि यहां वर्षों से ग्रामीणों व विभिन्न राजनीतिक दल आंदोलन के माध्यम से धरना प्रदर्शन कर रेलवे ओवरब्रिज की मांग करते आ रहे हैं.
हिरोडीह स्टेशन के रेलवे लाइन उस पार सभी महत्वपूर्ण सरकारी संस्थान है. ऐसे में मालगाड़ी खड़ी होने पर ट्रेन के नीचे से लाइन पार करना ग्रामीणों की मजबूरी है. अगर वे इंतजार करेंगे, तो देर हो जाती है. खासकर विद्यार्थियों को काफी परेशानी होती है.
उल्लेखनीय है लाइन के उस पार इंटर कॉलेज हिरोडीह, उच्च विद्यालय हिरोडीह, मध्य विद्यालय रेभनाडीह, नवसृजित प्राथमिक विद्यालय आंबेडकर नगर, पंचायत भवन व स्वास्थ्य उप केंद्र जैसे कई महत्वपूर्ण संस्थान हैं. इससे गाड़ी खड़ी के बावजूद लोगों का आना-जाना लगा रहता है. रेभनाडीह के अलावा हिरोडीह, कोसमाडीह, घंघरी, बाराडीह, बीरेद्र नगर समेत कई गांवों के लोग वर्षों से इस समस्या से जूझ रहे हैं. वाहन सवारों की स्थिति यह है कि उन्हें मिनटों का रास्ता घूम फिर कर घंटों में तय करना पड़ता है.
दो वर्ष पूर्व हुआ था पुल निर्माण का सर्वे
लगातार आंदोलन के बाद भी रेल प्रशासन की नींद नहीं टूटी. इसके बाद बांझेडीह के विस्थापितों द्वारा डीवीसी के खिलाफ होनेवाले हर आंदोलन मे हिरोडीह स्टेशन के निकट ओवरब्रिज की मांग उठी.
दो वर्ष पूर्व डीवीसी ने राइटस कंपनी से पुल निर्माण कार्य के लिए सर्वे भी कराया. तब लोगों को आशा जगी कि अब शायद ओवरब्रिज बन जाये. मगर व सर्वे भी ठंडे बस्ते में चला गया. इस मांग को लेकर एक बार फिर 15 जून को पूर्व अमित कुमार यादव के नेतृत्व में भाजपाइयों द्वारा हिरोडीह स्टेशन पर धरना दिया जायेगा.
