रनिया से भूषण कांसी की रिपोर्ट
सिक्किम के नामची जिला अंतर्गत समरडुंग एनएचपीसी तीस्ता स्टेज-6 जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन हेड रेस टनल में गैस रिसाव के बाद हुए विस्फोट में जान गंवाने वाले रनिया प्रखंड के डाहु गांव निवासी 22 वर्षीय कृष्णा साहू का शव शुक्रवार सुबह करीब नौ बजे गांव पहुंचा. शव पहुंचते ही पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई. हादसा इतना भीषण था कि कृष्णा का शव पूरी तरह झुलस गया था. परिजनों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे. गांव के लोगों ने नम आंखों से कृष्णा को अंतिम विदाई दी और उनका अंतिम संस्कार किया.
गैस रिसाव के बाद हुआ था विस्फोट
बताया गया कि 20 जुलाई को दोपहर करीब तीन बजे टनल के अंदर गैस रिसाव के बाद हुए विस्फोट में कृष्णा साहू मलबे में दब गए थे, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी. काफी मशक्कत के बाद शव को बाहर निकाला गया. इसके बाद निर्माण कार्य करा रही पटेल इंजीनियरिंग कंपनी ने एंबुलेंस से शव को सिक्किम से झारखंड के रनिया के डाहु गांव भेजा. कृष्णा का छोटा भाई बबलू साहू एवं दो अन्य साथी शव के साथ गांव पहुंचे. बबलू ने बताया कि कंपनी की ओर से तत्काल सहायता के रूप में 50 हजार रुपये दिए गए हैं.
जनप्रतिनिधियों ने परिजनों को बंधाया ढांढस
शव पहुंचने की सूचना मिलते ही भाजपा नेता निखिल कंडुलना, डाहु पंचायत के मुखिया रीमिश कांडुलना तथा झामुमो नेता दीपक भुइयां पीड़ित परिवार से मिलने उनके घर पहुंचे. सभी ने शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया तथा हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया.
एक महीने पहले ही रोजगार की तलाश में गया था सिक्किम
ग्रामीणों ने बताया कि कृष्णा साहू करीब एक माह पहले ही रोजगार की तलाश में सिक्किम गया था. झारखंड में रोजगार नहीं मिलने के कारण वह प्रवासी मजदूर के रूप में टनल निर्माण कार्य में लगा था. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और एक भीषण हादसे ने उसके परिवार की खुशियां छीन लीं. कृष्णा की मौत ने एक बार फिर झारखंड से पलायन और बेरोजगारी की गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है. रनिया प्रखंड से रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाने वाले प्रवासी मजदूरों की दुर्घटनाओं में मौत की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. ग्रामीणों ने सरकार से स्थानीय स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि गांव में ही रोजगार मिलता, तो शायद कृष्णा आज अपने परिवार के बीच जीवित होता.
