कस्तूरबा स्कूल खरौंधी प्रकरण : 5 दोषी कर्मियों की बर्खास्तगी के बाद बीईईओ और बीपीओ का वेतन बंद

Garhwa News: गढ़वा के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, खरौंधी प्रकरण में जिला प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है. 5 दोषी कर्मियों की बर्खास्तगी के बाद अब BEEO और BPO का वेतन रोक दिया गया है. प्रशासन मामले की विस्तृत जांच कर रहा है और जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जा रही है. पूरी खबर नीचे पढ़ें…

Garhwa News: कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, खरौंधी में पिछले 26 जून की रात अचानक 77 छात्राओं के अचानक बीमार होने के मामले में जिला प्रशासन ने बेहद कड़ा और निर्णायक कदम उठाया है. घटना के बाद उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा के निर्देश पर हुई त्वरित जांच के बाद सोमवार को पांचों दोषी संविदाकर्मियों की सेवा समाप्ति का आधिकारिक पत्र निर्गत कर दिया गया है. उपायुक्त ने छात्राओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मामले में ‘शून्य सहिष्णुता’ की नीति अपनाते हुए यह दंडात्मक कार्रवाई की है, जिससे पूरे शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है.

बीईईओ और बीपीओ से मांगा गया स्पष्टीकरण

जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, जिन पांच संविदाकर्मियों को तत्काल कार्यमुक्त किया गया है, उनमें वॉर्डन-सह-शिक्षिका लक्ष्मी देवी, पूर्णकालिक सामाजिक विज्ञान शिक्षिका अलका तिवारी, पूर्णकालिक विज्ञान शिक्षिका कोमल कुमारी, लेखापाल-सह-कम्प्यूटर ऑपरेटर सोनम रानी और पूर्णकालिक रसोइया कमला देवी शामिल हैं. इसके अलावा कर्तव्यहीनता के दायरे में आये प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी, खरौंधी और प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी खरौंधी से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है और जवाब आने तक उनके वेतन भुगतान पर रोक लगा दी गई है.

हैंडपंप पर ताला जड़ कर चली गई थी रसोइया

अनुमंउल पदाधिकारी (श्री बंशीधर नगर) एवं जिला शिक्षा अधीक्षक की संयुक्त जांच रिपोर्ट में विद्यालय की व्यवस्था को लेकर बेहद चौंकाने वाले और शर्मनाक तथ्य सामने आए हैं. रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ है कि घटना के वक्त विद्यालय की वॉर्डन लक्ष्मी देवी बिना किसी सक्षम प्राधिकार से अवकाश स्वीकृत कराए मनमाने तरीके से स्कूल से गायब थीं. वहीं, हद दर्जे की संवेदनहीनता दिखाते हुए विद्यालय की रसोइया कमला देवी ने परिसर के चापानल (हैंडपंप) में ताला जड़ रखा था. पानी जैसी मूलभूत सुविधा पर ताला बंद होने और जिम्मेदारों की मौके से गैरमौजूदगी के कारण ही यह पूरी अव्यवस्था फैली और इतनी बड़ी संख्या में छात्राएं बीमार हुईं.

कर्मियों पर गिरी गाज, मिला बर्खास्तगी का लेटर

घटना की अगली सुबह जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा सभी संबंधित कर्मियों से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया था. इस तय समयावधि में केवल लेखापाल सोनम रानी का जवाब प्राप्त हुआ, जो बेहद असंतोषजनक था, जबकि बाकी शिक्षिकाओं और कर्मियों ने तय समय में कोई जवाब ही प्रस्तुत नहीं किया. इसे घोर अनुशासनहीनता और लापरवाही मानते हुए डीसी ने सोमवार को उनकी संविदा समाप्त करने का अंतिम आदेश जारी कर दिया.

77 छात्राएं पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित

इधर प्रशासनिक स्तर पर राहत की बात यह है कि भवनाथपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में त्वरित उपचार के बाद सभी 77 छात्राएं अब पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित हैं. डीसी ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को कड़े निर्देश दिए हैं कि इस कार्रवाई की वजह से विद्यालय की छात्राओं की पढ़ाई और दैनिक गतिविधियों पर कोई आंच नहीं आनी चाहिए. वहां तुरंत वैकल्पिक शिक्षकों और रसोइया की व्यवस्था कर शैक्षणिक कार्य को सुचारु रूप से संचालित कराया जा रहा है. डीसी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जिले के किसी भी शैक्षणिक संस्थान में बच्चों की सुरक्षा और अनुशासन के मानकों से खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों या कर्मियों को बख्शा नहीं जाएगा.

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Published by: Amleshnandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.
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