अगले 100 साल के लिए बदल रहा जमशेदपुर, ग्रीन स्टील से बदलेगी शहर की तस्वीर

जमशेदपुर अगले 100 साल के लिए तैयार हो रहा है. टाटा स्टील पर्यावरण-अनुकूल तकनीक में भारी निवेश कर रही है, जिसका लक्ष्य 2045 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन हासिल करना है.

जमशेदपुर: हमारा शहर जमशेदपुर आने वाले सौ साल के लिए तैयार हो रहा है. टाटा स्टील और टाटा समूह के इर्द-गिर्द जमशेदपुर की बसावट है. कंपनी तेजी से अपने उत्पादन में बदलाव कर रही है. टाटा स्टील अपने मूल स्टील प्लांट का विस्तार चाहकर भी नहीं कर पा रही है, लेकिन डाउनस्ट्रीम में निवेश बड़े पैमाने पर होने जा रहा है. इससे शहर तेजी से विकसित होगा, जो क्लीन, ग्रीन स्टील सिटी बनेगी.

टाटा स्टील तकनीक और सारी चीजों में निवेश करती रही है और आगे भी करती रहेगी. निवेश की जहां तक बात है तो 1800 एकड़ में टाटा स्टील 11 मिलियन टन स्टील का उत्पादन कर रही है. इस प्लांट में अब सीधे तौर पर विस्तार संभव नहीं है, लेकिन डाउनस्ट्रीम में कंपनी निवेश जरूर करेगी. टाटा स्टील में हिसारना तकनीक और इजी मेल्ट टेक्नॉलॉजी में करीब 7 हजार करोड़ रुपये का निवेश कंपनी करने जा रही है.

इससे कोयले की खपत करीब 30 से 40 फीसदी घटेगी और कार्बन उत्सर्जन में कमी आयेगी. ये सभी परियोजनाएं पर्यावरण अनुकूल ग्रीन स्टील तकनीक पर आधारित होंगी. कांबी मिल में करीब 1500 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है और टिनप्लेट में करीब 2600 करोड़ रुपये की परियोजना पर काम चल रहा है. करीब 11 हजार करोड़ रुपये का निवेश कंपनी कर रही है. आगे भी निवेश जारी रहेगा.

टाटा स्टील ग्रीन स्टील और शून्य जीरो 2045 को लेकर तेजी से कर रही है काम

हमारा मानना है कि टाटा स्टील में वास्तविक प्रगति वही है जो पर्यावरण के अनुकूल हो और समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चले. वित्त वर्ष 2025-26 में हमने भारत में कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहलों में 473 करोड़ रुपये का निवेश किया, जिससे 69 लाख से अधिक जीवन प्रभावित हुए हैं. पिछले पांच वर्षों में हमारा कुल संचयी निवेश 2,500 करोड़ से अधिक रहा है, जो बड़े पैमाने पर सकारात्मक बदलाव लाने की हमारी निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

हमारे प्रमुख कार्यक्रम "मानसी प्लस" ने 3.1 लाख से अधिक महिलाओं, बच्चों और किशोरों तक पहुंच बनाकर उच्च जोखिम वाले स्वास्थ्य मामलों में 94 फीसदी समाधान दर हासिल की है. शिक्षा के क्षेत्र में हमने 5,800 से अधिक ड्रॉपआउट बच्चों को पुनः औपचारिक शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा है. जनजातीय पहचान और संस्कृति के संरक्षण के प्रति समर्पित रहते हुए हमने "संवाद" पहल के माध्यम से 167 जनजातियों को जोड़ा है और 88 बौद्धिक संपदाओं का समर्थन किया है.

पर्यावरण और स्थिरता के मोर्चे पर, हम 2045 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं. हम जमशेदपुर में 'हिसारना' डिमॉन्स्ट्रेशन प्लांट और अपनी एक ब्लास्ट फर्नेस में 'इजीमेल्ट' तकनीक के क्रियान्वयन जैसी अभूतपूर्व तकनीकों पर काम कर रहे हैं.

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By Brajesh kumar singh

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