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आज कलश यात्रा से शुरू होगा पांच दिवसीय श्री लक्ष्मीनारायण प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ

आज कलश यात्रा से शुरू होगा पांच दिवसीय श्री लक्ष्मीनारायण प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ

जमशेदपुर. केबल टाउन स्थित श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर (बिड़ला मंदिर) का पांच दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा समारोह तीन जुलाई (आज) से शुरू हो रहा है. इसकी शुरुआत कलश यात्रा से होगी. यह जानकारी श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर जीर्णोद्धार समिति के संयोजक विधायक सरयू राय ने मंगलवार को मंदिर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में दी. उन्होंने कहा कि कलश यात्रा के लिए महिला श्रद्धालु सुबह छह बजे मंदिर प्रांगण में जुटेंगी. वहां से बस से सभी दोमुहानी घाट जायेंगी. जहां मां गंगा की पूजा और मंत्रोच्चार के साथ पवित्र जल भरा जायेगा. वहां से सभी बस से ही टिनप्लेट तक आयेंगे. जहां से पैदल कलश यात्रा शुरू होगी.

प्राण प्रतिष्ठा के बाद श्रद्धालु हर दिन कर सकेंगे पूजा

श्री राय ने कहा कि मंदिर में श्री लक्ष्मीनारायण, मां काली, शिव परिवार, गणपति देव और बजरंग बली की प्रतिमाएं आ गयीं हैं. सात जुलाई को सभी प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा होगी. इसमें बेगूसराय के पंडित गौरीकांत ठाकुर के अलावा सभी स्थानीय पंडित-पुरोहित मौजूद रहेंगे. चतुर्मास शुरू होने के कारण अन्य पंडित-पुरोहित को आना संभव नहीं हो सका. इसके साथ ही आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के पट खुल जायेंगे. हर दिन श्रद्धालु यहां पूजा कर सकेंगे.

पंडित विजयशंकर मेहता व किशोर कुणाल होंगे शामिल

उन्होंने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान पांच जुलाई को जीवन प्रबंधन विशेषज्ञ और कथावाचक पंडित विजयशंकर मेहता का उद्बोधन होगा. इसके लिए मंदिर प्रांगण में वाटरप्रूफ पंडाल बनाये गये हैं. सरयू राय ने कहा कि पटना के महावीर मंदिर के किशोर कुणाल से बात हुई है. समारोह के दौरान किसी एक दिन वे यहां आयेंगे. छह जुलाई की दोपहर में नगर भ्रमण होगा. जिसका रूट अभी तय नहीं हुआ है. चार से सात जुलाई तक लगातार यज्ञ चलेगा.

समारोह के बाद शेष काम होगा पूरा

उन्होंने कहा कि अभी जीर्णोद्धार का केवल 25 प्रतिशत काम पूरा हुआ है. शेष 75 फीसदी काम समारोह के बाद होगा. इसके लिए किसी से चंदा आदि नहीं लिया गया है. इसमें देवस्थानम जीर्णोद्धार ट्रस्ट का सहयोग मिल रहा है. इसमें अशोक भालोटिया, दिलीप गोयल और आदर्श दोदराजका शामिल हैं. सभी से विचार-विमर्श कर आगे का काम बढ़ाया जायेगा. साक्षात्कार के आधार पर योग्य पुजारियों का चयन किया जायेगा. मंदिर के कामों की देखरेख के लिए प्रबंधक रखे जायेंगे. इसके लिए मैनेजमेंट के विद्यार्थी का चयन होगा.

बनेगा आध्यात्मिक केंद्र

पूजा-पाठ के अलावा इसे आध्यात्मिक केंद्र बनाया जायेगा. धार्मिक पुस्तकालय बनेगा. इसमें शैव, वैष्णव, अघोर सहित सभी पंथों की पुस्तकें रखी जायेंगी. प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना भी की जायेगी. इसमें वैदिक मंत्रों का सही उच्चारण करना बताया जायेगा. इसके लिए धर्म के विद्वान यहां रहेंगे.

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