पटमदा : केंद्रीय कमेटी के निर्देश पर खान एवं खनिज संशोधन विधेयक (एमएमडीआर बिल) के विरोध में सोमवार को झामुमो पटमदा प्रखंड कमेटी की बैठक आयोजित की गई. अश्विनी महतो की अध्यक्षता में हुई बैठक में विभिन्न पंचायतों से आए पार्टी कार्यकर्ताओं को बिल के प्रावधानों और इसके संभावित प्रभावों की जानकारी दी गई.
अधिकारों की लड़ाई के लिए हुआ था झामुमो का गठन : विक्टर
मुख्य अतिथि झामुमो के पूर्वी सिंहभूम जिलाध्यक्ष विक्टर सोरेन ने कहा - झामुमो का गठन सत्ता में आने के लिए नहीं, बल्कि अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए हुआ था. आज फिर पार्टी को उसी संघर्ष के दौर से गुजरना पड़ रहा है. उन्होंने कहा - बिना पर्याप्त चर्चा के लोकसभा व राज्यसभा से विधेयक पारित कराकर राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है. उन्होंने कहा - खान व खनिज से मिलने वाली रॉयल्टी व सेस से राज्य को करीब 15 हजार करोड़ रुपये की आय होती थी. इससे विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जाती थी. अब इन योजनाओं पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करना पार्टी कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है.
पार्टी की केंद्रीय समिति ने लिया नाकेबंदी का निर्णय : विक्टर
उन्होंने कहा, संपत्ति हमारी और निर्णय गुजरात व दिल्ली के लोग लें, यह नहीं चलेगा. विक्टर सोरेन ने बताया - पार्टी की केंद्रीय समिति ने आर्थिक नाकेबंदी का निर्णय लिया है. इसके तहत पहले चरण में 31 अगस्त को जनजागरण अभियान चलाकर गांव-गांव व घर-घर जाकर लोगों के साथ चर्चा की जाएगी. दूसरे चरण में 7 सितंबर को प्रखंड मुख्यालय पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन दिया जाएगा. विशिष्ट अतिथि केंद्रीय सदस्य महाबीर मुर्मू ने कहा कि पटमदा क्षेत्र के लिए यह बैठक महत्वपूर्ण है. इस कानून का सबसे अधिक असर झारखंड पर पड़ेगा और इसे वापस कराने के लिए लंबी लड़ाई लड़नी होगी.
एमएमडीआर बिल झारखंड के लिए काला कानून : चंद्रशेखर
उन्होंने कहा - किसान आंदोलन की तर्ज पर व्यापक आंदोलन खड़ा करना होगा तथा इसके नुकसान के बारे में एक एक ग्रामीणों को जानकारी देनी होगी. उन्होंने कहा - झारखंड का कोयला और यूरेनियम रोक दिया जाए तो पूरे देश की ऊर्जा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है. जिला संगठन सचिव चंद्रशेखर टुडू ने एमएमडीआर बिल को झारखंड के लिए काला कानून बताते हुए कहा कि यह राज्य के विकास में बाधक है. बैठक में सुभाष कर्मकार, हरिहर सिंह, रामनाथ महतो, बेनीमाधव दत्त, सत्यवती सिंह और जितुलाल मुर्मू मौजूद थे.
