ऑपरेशन जीरो टॉलरेंस : दो माह में 67 गिरफ्तारियां, फिर भी नहीं टूटी नशे और हथियारों की सप्लाई चेन...

जमशेदपुर पुलिस का 'ऑपरेशन जीरो टॉलरेंस' जारी. 2 महीने में 67 गिरफ्तारियां, 133 किलो गांजा व 10 हथियार जब्त. पर असली सरगना कहां?

जमशेदपुर: औद्योगिक नगरी जमशेदपुर में अपराध और नशे के खिलाफ पुलिस का ‘ऑपरेशन जीरो टॉलरेंस’ जारी है. जुलाई और अगस्त 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, पुलिस ने नशे के कारोबार से जुड़े 36 आरोपियों और अवैध हथियार के मामले में 31 अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है.

इस दौरान 133.9 किलो गांजा, 108.6 ग्राम ब्राउन शुगर, 10 देशी हथियार और 15 जिंदा कारतूस बरामद किये गये. कार्रवाई के आंकड़े पुलिस की सक्रियता की तस्वीर पेश करते हैं, लेकिन बड़ा सवाल अब भी कायम है कि शहर में नशे और अवैध हथियारों की थोक सप्लाई करने वाले असली सरगना आखिर कहां हैं?

दो माह में नशे के 18 मामले, 36 गिरफ्तार

पुलिस की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार जुलाई-अगस्त में नशीले पदार्थों से जुड़े 18 मामले दर्ज किये गये. इनमें 36 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई. पुलिस ने 133.9 किलो गांजा और 108.6 ग्राम ब्राउन शुगर बरामद किया. कार्रवाई से सड़क और मोहल्लों में नशे की पुड़िया बेचने वाले पेडलरों पर शिकंजा कसा है. हालांकि, सवाल यह है कि इन छोटे विक्रेताओं तक नशे की खेप पहुंचाने वाले बड़े सप्लायरों तक पुलिस कब पहुंचेगी.

ब्राउन शुगर और गांजे का नेटवर्क दूसरे राज्यों से जुड़ा

पुलिस की जांच में नशीले पदार्थों की सप्लाई के तार ओडिशा और पश्चिम बंगाल से जुड़े होने की बात सामने आयी है. गांजे की बड़ी खेप ओडिशा की ओर से आने की बात कही जा रही है, जबकि ब्राउन शुगर के लिए पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद समेत दूसरे रूट का इस्तेमाल होने की जानकारी जांच में सामने आयी है. ऐसे में केवल स्थानीय पेडलरों की गिरफ्तारी से पूरे नेटवर्क को तोड़ना चुनौती बना हुआ है.

31 अपराधी गिरफ्तार, 10 हथियार और 15 कारतूस जब्त

अवैध हथियार के खिलाफ अभियान में पुलिस ने दो माह में 10 मामले दर्ज किये और 31 आरोपियों को गिरफ्तार किया. इनके पास से 10 देशी हथियार और 15 जिंदा कारतूस बरामद किये गये.

हथियार लेकर घूमने वाले अपराधियों पर कार्रवाई के बावजूद इनकी सप्लाई लाइन पर सवाल बरकरार है. जांच में मुंगेर समेत अंतरराज्यीय नेटवर्क से हथियार आने की आशंका जतायी गयी है. अब पुलिस के सामने स्थानीय खरीदारों से आगे बढ़कर हथियार उपलब्ध कराने वाले सप्लायरों तक पहुंचने की चुनौती है.

2000 संदिग्धों की जांच, 787 पीआर बॉन्ड पर छूटे

अड्डेबाजी और संदिग्ध गतिविधियों पर रोक के लिए पुलिस ने करीब 2000 संदिग्धों की जांच की. इनमें 787 लोगों को पीआर बॉन्ड पर छोड़ा गया. पुलिस की त्वरित कार्रवाई से असामाजिक तत्वों पर दबाव बना है, लेकिन स्थायी रोकथाम के लिए मजबूत सूचना तंत्र की जरूरत महसूस की जा रही है. खासकर उन ठिकानों और नेटवर्क की पहचान जरूरी है, जहां से अपराध और नशे का संचालन होता है.

पेडलरों से आगे बढ़कर किंगपिन तक पहुंचना होगी चुनौती

पुलिस के सामने अब कार्रवाई को अगले स्तर तक ले जाने की चुनौती है. पकड़े गये आरोपियों से बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज की जांच कर यह पता लगाना जरूरी होगा कि माल कहां से आया और किसे पहुंचाया जाना था.

बड़े तस्करों की आर्थिक गतिविधियों की जांच और अवैध संपत्ति पर कार्रवाई से नेटवर्क की वित्तीय रीढ़ तोड़ी जा सकती है. साथ ही थानों के खुफिया और मुखबिर तंत्र को मजबूत कर थोक सप्लायरों और उनके ठिकानों तक पहुंचना होगा. तभी सड़क पर दिख रहे छोटे पेडलरों के साथ-साथ पर्दे के पीछे बैठे किंगपिन पर भी शिकंजा कस सकेगा.

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By Shyam narayan jha

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