Jamshedpur news: कचरा पावर प्लांट के विरोध में सैकड़ों ग्रामीणों का प्रदर्शन, बोले- यहां नहीं होने देंगे निर्माण

बालीगुमा मौजा में प्रस्तावित कचरा पावर प्लांट के खिलाफ स्थानीय ग्रामीण लामबंद हो गए हैं. ग्रामसभा के बैनर तले एकजुट होकर ग्रामीणों ने मानगो अंचल कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया. उन्होंने घनी आबादी वाले इलाके में प्लांट निर्माण पर रोक लगाने की मांग की है.

जमशेदपुर: बालीगुमा मौजा स्थित गोड़गोड़ा धर्मबांधा टोला (गाजाडीह) में प्रस्तावित कचरा पावर प्लांट को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है. शुक्रवार को ग्रामसभा के बैनर तले सैकड़ों ग्रामीण एकजुट हुए और मानगो अंचल कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन कर प्रशासन के खिलाफ विरोध दर्ज कराया. ग्रामीणों ने एक स्वर में मांग की कि घनी आबादी वाले इलाके में कचरा पावर प्लांट का निर्माण किसी भी हाल में नहीं किया जाए.

जनस्वास्थ्य और पर्यावरण को लेकर जतायी चिंता

विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे विजय सोय ने कहा कि जिस स्थान पर कचरा पावर प्लांट लगाने की योजना बनायी जा रही है, वह घनी आबादी से घिरा हुआ क्षेत्र है. ग्रामीणों का कहना है कि प्लांट शुरू होने के बाद क्षेत्र में जहरीला धुआं और पेयजल प्रदूषण फैलने का खतरा है. इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है.

ग्रामीणों ने कहा कि हवा और पानी दूषित होने से क्षेत्र में गंभीर बीमारियां फैलने की आशंका है. उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य और पर्यावरण की कीमत पर किसी भी विकास योजना को स्वीकार नहीं किया जायेगा.

प्लॉट संख्या 4168 को लेकर उठे सवाल

ग्रामीणों के अनुसार, जिस प्लॉट संख्या 4168 पर कचरा पावर प्लांट प्रस्तावित है, वह वर्षों से ग्रामीणों के सामाजिक और धार्मिक आयोजनों का प्रमुख केंद्र रहा है. इसके अलावा यह बच्चों के खेल-कूद का एकमात्र मैदान भी है.

विजय सोय ने बताया कि उक्त भूमि को लेकर स्थानीय निवासी मोशो हांसदा का मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है. ग्रामीणों का कहना है कि इसके बावजूद प्रशासन की ओर से विवादित स्थल पर निर्माण कार्य शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है, जो चिंता का विषय है.

ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रस्तावित कचरा पावर प्लांट के निर्माण पर रोक लगाने की मांग की है.


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लेखक के बारे में

By दशमत सोरेन

दशमत सोरेन ने रांची विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर किया है. वे 29 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उनकी विशेषज्ञता मुख्य रूप से झारखंड की आदिवासी-मूलवासी राजनीति, स्थानीय समुदायों की भाषा-संस्कृति और यहां के सामाजिक ताना-बाना है. वे वर्ष 2010 से प्रभात खबर के साथ एक ट्राइबल रिपोर्टर के रूप में काम कर रहे हैं.

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