वरीय संवाददाता, जमशेदपुर
दयानंद पब्लिक स्कूल में शिक्षकों के लिए टीचिंग फॉर अंडरस्टैंडिंग नॉट मेमोराइजेशन विषय पर एक प्रोफेशनल डेवलपमेंट सेशन का आयोजन किया गया. इसका उद्देश्य शिक्षकों को ऐसी शिक्षण पद्धतियों से अवगत कराना था, जिनसे विद्यार्थियों में रटने की बजाय विषयों की गहरी समझ विकसित हो सके. कार्यक्रम का शुभारंभ शिक्षा समिति के आमंत्रित सदस्य प्रमोद दुबे, स्कूल की प्रिंसिपल अर्चना रहल व समन्वयकों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया.
'कैसे' से पहले 'क्यों' की समझ है जरुरी
सत्र में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि विद्यार्थियों को किसी भी विषय का ‘कैसे’ सिखाने से पहले उसके पीछे का ‘क्यों’ समझाया जाये, ताकि उनमें आलोचनात्मक चिंतन, जिज्ञासा और समस्या-समाधान की क्षमता विकसित हो सके. कार्यशाला के दौरान शिक्षकों ने चर्चा, व्यावहारिक उदाहरणों और विभिन्न सहभागितापूर्ण गतिविधियों के माध्यम से ऐसी शिक्षण तकनीकों पर विचार-विमर्श किया, जो कक्षा को अधिक रोचक, प्रभावी और विद्यार्थी-केंद्रित बना सके. साथ ही इस बात पर भी बल दिया गया कि सीखने की प्रक्रिया केवल परीक्षा तक सीमित न रहे, बल्कि विद्यार्थी अर्जित ज्ञान का वास्तविक जीवन में भी प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें.
क्रिएटिव टीचिंग पर जोर
सेशन में शिक्षकों से कहा गया कि वे क्लासरूम टीचिंग में नए तरीके अपनाएं, बच्चों की क्रिएटिविटी और सवाल पूछने की आदत को बढ़ावा दें और हर विषय को आसान और साफ तरीके से समझाएं. स्कूल की शिक्षा समिति के चेयरमैन ज्ञान तनेजा ने कहा कि शिक्षकों के टीचिंग-लर्निंग मेथड को बेहतर बनाने के लिए ऐसे सेशन आगे भी होते रहेंगे. प्रिंसिपल अर्चना रहल ने कहा कि स्कूल शिक्षकों की लगातार ट्रेनिंग और बेहतर शिक्षा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. ऐसे ट्रेनिंग प्रोग्राम्स से शिक्षक 21वीं सदी की जरूरतों के हिसाब से विद्यार्थियों को बेहतर तरीके से तैयार कर सकेंगे.
