Jamshedpur: 53 साल की उम्र में दीप्ति खेमानी ने माउंट किलिमंजारो पर लहराया तिरंगा

Jamshedpur: प्रेमलता अग्रवाल से प्रेरित होकर 53 साल की दीप्ति खेमानी ने माउंट किलिमंजारो पर तिरंगा फहरा दिया है. उन्होंने इतिहास रच दिया है.

संजीव भारद्वाज
Jamshedpur: लौहनगरी की महिलाओं ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अगर इरादे फौलादी हों, तो उम्र महज एक आंकड़ा है. शहर के सीएच एरिया की रहने वाली 53 वर्षीया दीप्ति खेमानी ने अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो (5,895 मीटर) पर सफलतापूर्वक फतह हासिल कर जमशेदपुर का मान बढ़ाया है. उन्होंने 27 फरवरी को सुबह 7:45 बजे किलिमंजारो के उहुरू पीक पर कदम रखा. इस उपलब्धि के लिए उन्हें तंजानिया नेशनल पार्क्स द्वारा आधिकारिक पर्वतारोहण प्रमाणपत्र भी प्रदान किया गया है.

प्रेमलता अग्रवाल से मिली प्रेरणा

दो बच्चों की मां और एक कुशल होममेकर दीप्ति खेमानी ने अपनी इस सफलता का श्रेय विख्यात पर्वतारोही और पद्मश्री प्रेमलता अग्रवाल को दिया है. दीप्ति ने बताया कि एवरेस्ट फतह करने वाली सबसे उम्रदराज भारतीय महिला प्रेमलता अग्रवाल ही उनकी प्रेरणास्रोत रहीं. शुरुआत में पर्वतारोहण उनके लिए केवल एक शौक था, लेकिन धीरे-धीरे यह उनके जीवन का जुनून बन गया. उन्होंने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, कम ऑक्सीजन और भीषण ठंड के बावजूद हार नहीं मानी और दुनिया के सबसे ऊंचे स्वतंत्र खड़े पर्वत को फतह करने का संकल्प पूरा किया.

परिवार बना ताकत

अपनी सफलता पर खुशी व्यक्त करते हुए दीप्ति ने कहा कि उनके पति प्रकाश खेमानी (व्यवसायी), पुत्र ओजस्वी, बहू ईवा और पुत्री विदुषी ने हमेशा उन्हें प्रोत्साहित किया. परिवार के सहयोग के कारण ही वे घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपने साहसिक सपनों को पूरा कर पायीं. उन्होंने कहा कि माउंट किलिमंजारो की चढ़ाई शारीरिक क्षमता से अधिक मानसिक दृढ़ता की परीक्षा थी.

महिलाओं के लिए बनीं मिसाल

दीप्ति की इस उपलब्धि की शहर के खेल प्रेमियों और एडवेंचर जगत से जुड़े लोगों ने सराहना की है. उनका कहना है कि 53 वर्ष की आयु में ऐसी कठिन चढ़ाई पूरी करना मध्यम आयु वर्ग के लोगों, विशेषकर महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है. दीप्ति ने यह संदेश दिया है कि सपनों को पूरा करने और नई ऊंचाइयों को छूने के लिए कभी भी देर नहीं होती. माउंट किलिमंजारो को दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण ट्रेकिंग स्थलों में गिना जाता है, जहां सफल अनुकूलन ही जीत की कुंजी होती है.

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By AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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