Coal Crisis : झारखंड में लगातार बारिश से देश में गहराया कोयला संकट, 57 पावर प्लांट में सिर्फ 4-5 दिन का स्टॉक

झारखंड और आसपास के कोयला क्षेत्रों में लगातार बारिश से कोयला उत्पादन और ढुलाई प्रभावित हुई है. इसका सीधा असर देश के थर्मल पावर प्लांटों पर पड़ा है, जिससे 57 बिजलीघरों में केवल 4-5 दिनों का कोयला स्टॉक बचा है.

झारखंड और आसपास के कोयला उत्पादक क्षेत्रों में लगातार हुई बारिश से अगस्त में कोयला उत्पादन और ढुलाई प्रभावित हुई है. इसका सीधा असर देश के थर्मल पावर प्लांटों पर पड़ा है. कई बिजलीघरों में अब सिर्फ चार से पांच दिनों का कोयला स्टॉक बचा है.

जरूरत का करीब 47 प्रतिशत ही कोयला

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के 4 सितंबर के आंकड़ों के अनुसार, देश के 57 कोयला आधारित बिजलीघर क्रिटिकल स्टॉक की स्थिति में पहुंच गये हैं. इन बिजलीघरों में करीब 27.1 मिलियन टन कोयला उपलब्ध है, जबकि सामान्य स्थिति में करीब 57.7 मिलियन टन कोयले की जरूरत होती है. यानी बिजलीघरों में उपलब्ध कोयला सामान्य जरूरत का करीब 47 प्रतिशत ही रह गया है.

मांग बढ़ने से बिजलीघरों पर दबाव

झारखंड की एक कोयला कंपनी के अधिकारी के अनुसार, जनवरी से मार्च के बीच बिजलीघरों में कोयले का स्टॉक पर्याप्त था. इस वजह से कई बिजलीघरों ने कोयला लेना कम कर दिया था. इसके बाद कई राज्यों में बारिश कम होने से घरेलू, औद्योगिक और कृषि क्षेत्र में बिजली की मांग बढ़ गयी. इससे बिजलीघरों की कोयले की मांग भी बढ़ गयी.

मानसून से उत्पादन और परिवहन प्रभावित

दूसरी ओर, मानसून के दौरान कोयला खदानों में उत्पादन और परिवहन प्रभावित होता है. लगातार बारिश से खदानों में कोयला सीम गीली और चिपचिपी हो जाती हैं. निचले इलाकों की कुछ खदानों में पानी भरने से उत्पादन पर असर पड़ता है. खदानों की आंतरिक सड़कों पर भी परिवहन प्रभावित होता है.

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कोयला आपूर्ति बढ़ाने में जुटी कंपनियां

कोयला मंत्रालय ने झारखंड समेत सभी कोयला कंपनियों को बिजलीघरों को अधिक से अधिक कोयला भेजने का निर्देश दिया है. सितंबर की शुरुआत में बारिश कमजोर पड़ने के बाद उत्पादन और कोयला डिस्पैच में सुधार की उम्मीद है. फिलहाल बिजलीघरों को करीब 1.7 मिलियन टन कोयला रोज भेजा जा रहा है. पहले यह मात्रा करीब 1.2 से 1.4 मिलियन टन के आसपास थी. घटते स्टॉक को देखते हुए कोल इंडिया लिमिटेड ने फ्यूल सप्लाई एग्रीमेंट वाले बिजलीघरों को वार्षिक अनुबंध में तय मात्रा से अधिक कोयला उठाने की अनुमति देने की पहल की है. इसका उद्देश्य उन बिजलीघरों का स्टॉक बढ़ाना है, जहां कोयले की कमी के कारण बिजली उत्पादन प्रभावित होने का खतरा है.

राजस्थान और उत्तर प्रदेश में ज्यादा दबाव

क्षेत्रवार स्थिति देखें तो उत्तरी क्षेत्र में कोयले की कमी ज्यादा दिखाई दे रही है. सीईए के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान के सभी सात थर्मल पावर प्लांट क्रिटिकल स्टॉक की स्थिति में थे. इन बिजलीघरों को एनसीएल और एसईसीएल से कोयला मिलता है. उत्तर प्रदेश के सात बिजलीघरों में भी कोयले की कमी है. इनमें चार बिजलीघरों को झारखंड की कोयला कंपनियों से कोयला मिलता है.

पंजाब के पावर प्लांटों में सिर्फ पांच से छह दिनों का कोयला

पंजाब में भी स्थिति चिंताजनक है. राज्य के निजी क्षेत्र के राजपुरा और तलवंडी साबो थर्मल पावर प्लांटों में करीब पांच से छह दिनों का ही कोयला बचा है. दोनों बिजलीघरों की कुल उत्पादन क्षमता करीब 3,380 मेगावाट है. राजपुरा को सीसीएल से, जबकि तलवंडी साबो को एसईसीएल से कोयला मिलता है.

झारखंड में बारिश से रैक की संख्या घटी

सीसीएल के सीएमडी निलेंदु कुमार सिंह ने बताया कि 25 अगस्त से 2 सितंबर तक झारखंड में हुई भारी बारिश से कोयला उत्पादन और ढुलाई प्रभावित हुई. इस दौरान बिजलीघरों को करीब 25 रैक ही भेजे जा पा रहे थे. अब स्थिति में सुधार हो रहा है और करीब 40 रैक भेजे जा रहे हैं. इसे बढ़ाकर 46 रैक तक करने का लक्ष्य है. उन्होंने बताया कि बरसात के दौरान कोयला कंपनियां ज्यादा स्टॉक रखना पसंद नहीं करती हैं. इसी वजह से बारिश के दौरान आपूर्ति प्रभावित होने पर बिजलीघरों में कोयले का स्टॉक तेजी से कम हो जाता है.

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57 बिजलीघर क्रिटिकल श्रेणी में

सीईए के मानकों के अनुसार, किसी थर्मल पावर प्लांट में उसकी सामान्य जरूरत का 25 प्रतिशत से कम कोयला बचने पर उसे क्रिटिकल श्रेणी में रखा जाता है. 4 सितंबर को क्रिटिकल घोषित 57 बिजलीघरों में 52 घरेलू कोयले पर आधारित, चार आयातित कोयले पर आधारित और एक वॉशरी रिजेक्ट कोयले पर आधारित बिजलीघर था.

मुख्य आंकड़े

  • क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट : 57
  • घरेलू कोयले पर आधारित : 52
  • आयातित कोयले पर आधारित : 4
  • वॉशरी रिजेक्ट आधारित : 1
  • उपलब्ध कोयला : 27.1 मिलियन टन
  • सामान्य जरूरत : 57.7 मिलियन टन
  • उपलब्धता : करीब 47 प्रतिशत
  • कमी : करीब 30.6 मिलियन टन

झारखंड से कोयला पाने वाले प्रमुख क्रिटिकल बिजलीघर

  • महात्मा गांधी विद्युत संयंत्र, हरियाणा : सीसीएल
  • हरदुआगंज टीपीएस, उत्तर प्रदेश : बीसीसीएल और सीसीएल
  • जवाहरपुर एसटीपीएस, उत्तर प्रदेश : बीसीसीएल और सीसीएल
  • टांडा टीपीएस, उत्तर प्रदेश : सीसीएल
  • पनकी टीपीएस, उत्तर प्रदेश : सीसीएल
  • नबीनगर पावर प्लांट, बिहार : सीसीएल
  • पतरातू एसटीपीएस : सीसीएल

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By Manoj Singh

मनोज सिंह फिलहाल प्रभात खबर में बतौर मुख्य संवाददाता कार्यरत है. पत्रकारिता में उनका 26 साल का अनुभव है. दैनिक हिन्दुस्तान में करीब आठ साल काम करने के बाद वह प्रभात खबर से जुड़े हैं. कृषि, पशुपालन, सहकारिता, वन, जलवायु परिवर्तन, आजीविका, मनोरोग, कोयला संबंधी खबरों में वर्षों काम करने का अनुभव है. आइआइटी कानपुर से जस्ट ट्रांजिशन विषय पर फेलोशिप प्राप्त करने वाले देश के पहले संवाददाता है. उनको दो बार एग्रई जर्निलिज्म अवार्ड मिल चुका है. झारखंड सरकार के वन विभाग से तिलका मांझी अवार्ड मिला है. कई मचों पर वह प्रभात खबर का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में हिस्सा ले चुके हैं.

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