हजारीबाग: श्री 1008 शांतिनाथ महामंडल विधान शुक्रवार को श्रद्धा, भक्ति, उमंग और उत्साह के साथ संपन्न हुआ. 16 दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन में महिला, पुरुष, युवा, बच्चे और बुजुर्ग समेत समाज के सभी वर्गों के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.
विधान के दौरान प्रतिदिन प्रातः भगवान श्री 1008 शांतिनाथ की प्रतिमा का अभिषेक किया गया. प्रतिष्ठाचार्य पंडित दीपक शास्त्री की देखरेख में विधि-विधान के साथ पूजन-पाठ और भगवान की आराधना की गयी. पूरे विधान के दौरान श्रद्धालुओं ने प्रतिदिन 120 अर्घ्य समर्पित कर भगवान श्री 1008 शांतिनाथ के अनंत गुणों का भावपूर्ण गुणगान किया.
धार्मिक आयोजन के दौरान भक्ति संगीत का भी विशेष माहौल रहा. भक्ति की धुनों पर श्रद्धालु झूमते-गाते रहे. ललित अजमेरा के मधुर भजनों ने श्रद्धालुओं को भक्तिरस में सराबोर किया. ढोलक पर शिबू तथा कैसियो और अन्य वाद्ययंत्रों पर विकास की प्रस्तुति ने आयोजन में भक्ति का रंग और गहरा कर दिया.
पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान की परिक्रमा लगायी और श्रद्धा एवं भक्तिभाव से आराधना की. विधान के दौरान भगवान श्री 1008 शांतिनाथ के अनंत गुणों का स्मरण करते हुए उनकी भक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला गया. श्रद्धालुओं ने कहा कि प्रभु की सच्ची और निष्पक्ष भक्ति तन-मन को पवित्र करती है.
निर्वाण लाडू अर्पित कर हुआ धार्मिक आयोजन का समापन
श्रेयांसनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर निर्वाण लाडू अर्पित किया गया. इसके बाद विधान की धार्मिक पूर्णाहुति विश्व शांति महायज्ञ और हवन के साथ हुई.
आयोजन के सफल संचालन में योगदान देने वाले प्रतिष्ठाचार्य पंडित दीपक शास्त्री, संगीतकार ललित अजमेरा, ढोलक वादक शिबू तथा कैसियो एवं अन्य वाद्ययंत्र वादक विकास समेत सभी सहयोगियों और प्रतिभागियों को श्री दिगंबर जैन पंचायत एवं जैन महिला समाज की ओर से सम्मानित किया गया.
मीडिया हेड विजय जैन लुहाड़िया ने कहा कि 16 दिवसीय विधान में समाज के सभी वर्गों ने ऊर्जा, श्रद्धा और उत्साह के साथ भाग लिया. आयोजन ने समाज के लोगों को धार्मिक आस्था के साथ एकजुट होने का अवसर भी दिया.
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