बरकट्ठा: भारतीय जंगलों से एक समय में लगभग गायब हो चुके और विलुप्त की कगार पर पहुंच चुके भारतीय गिद्ध (इंडियन वल्चर) बरकट्ठा वन क्षेत्र में दिखा. बरकट्ठा के महावर पहाड़ और कपका-कुरचुनोबेडो पुल के समीप इन दुर्लभ पक्षियों का बड़ी संख्या में दिखना वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए किसी बड़ी सफलता से कम नहीं है.
बरकट्ठा फॉरेस्टर पंकज कुमार ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से इस वन क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में भारतीय गिद्धों की अच्छी खासी संख्या दर्ज की जा रही है. इनमें कुछ कम उम्र (छोटे) गिद्ध भी शामिल हैं. इस इलाके में उनका प्राकृतिक आवास पूरी तरह सुरक्षित है और वे यहां सफलतापूर्वक प्रजनन कर रहे हैं. महावर पहाड़ लंबे समय से इन पक्षियों का स्थायी आशियाना रहा है. वन्यजीव विशेषज्ञों के आंकड़े डराने वाले हैं.
1980 के दशक तक भारत के आसमान और जंगलों में करोड़ों की संख्या में घूमने वाले गिद्ध आज विलुप्त के मुहाने पर हैं. पशुओं के इलाज में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाली डाइक्लोफेनाक नामक दवा, प्राकृतिक आवासों का तेजी से नष्ट होना और भोजन की कमी इनकी आबादी में 99 प्रतिशत तक की भारी गिरावट मुख्य वजहें बनीं. आज पूरे देश में इनकी संख्या घटकर महज कुछ हजार तक सिमट कर रह गई है.
भारतीय वन्यजीव संस्थान के अनुसार, गिद्ध अपने पारंपरिक घोंसलों वाले इलाकों से बड़े पैमाने पर गायब हो चुके हैं. भारत में आज भी गिद्धों की कुल नौ प्रजातियां दर्ज हैं, लेकिन इनमें भारतीय गिद्ध, सफेद पीठ वाला गिद्ध, पतली चोंच वाला गिद्ध और लाल सिर वाला गिद्ध अधिक संकट ग्रस्त श्रेणी में आते हैं.
ऐसे संवेदनशील दौर में बरकट्ठा वन क्षेत्र में इनकी सक्रिय मौजूदगी पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मानी जा रही है. इस बीच, वन विभाग ने स्थानीय लोगों से वन्यजीव संरक्षण में सहयोग करने की अपील की है. विभाग ने कहा है कि किसी को भी आसपास गिद्धों का झुंड या उनका घोंसला दिखाई दे, तो तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दे, ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
