गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट
Gumla News: जब प्रशासन किसी समस्या का समाधान करने के बजाय घोड़ा बेचकर सो जाता है और जनप्रतिनिधि अनसुनी करना शुरू कर देते हैं, तो जनता खुद मोर्चा संभाल लेती है. झारखंड के गुमला जिले के पालकोट प्रखंड की कुल्लूकेरा पंचायत के सिंजाग गांव में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला. सिंजाग गांव के लोग बरसों से एक अदद सड़क की बाट जो रहे थे. बरसात के दिनों में उन्हें आने-जाने में परेशानी होती थी. उन लोगों ने प्रशासन से गुहार लगाई. जनप्रतिनिधियों के सामने आवेदन पर आवेदन दिए, लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी. जब सब जगह से उन्हें कुछ नहीं मिला, तो ग्रामीणों ने खुद ही कुदाल उठाकर सड़क बनाने के काम में जुट गए.
श्रमदान से बनाई एक किलोमीटर सड़क
खबर है कि सिंजाग गांव के ग्रामीणों ने खुद की पहल करते हुए श्रमदान से सड़क निर्माण कार्य शुरू कर दिया है. शुक्रवार को गांव के सैकड़ों महिला और पुरुषों ने एकजुट होकर करीब एक किलोमीटर लंबी सड़क को सुगम बनाने के लिए श्रमदान किया. ग्रामीणों ने बताया कि यह रास्ता सिंजाग गांव सहित आंबाटोली, ऊपरघाट और डांड़टोली को जोड़ता है. यह रास्ता इन इलाकों के लोगों के लिए पालकोट प्रखंड मुख्यालय और अन्य क्षेत्रों तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता है. गांव के ही गोविंद मुंडा ने कहा कि यह गांव का एकमात्र संपर्क मार्ग है. जिससे होकर ग्रामीण प्रखंड मुख्यालय और अन्य स्थानों तक आते-जाते हैं. बरसात के दिनों में सड़क की स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि इस पर चलना भी मुश्किल हो जाता है.
बरसात के दिनों में घर से निकलना मुश्किल
बरसात के मौसम में सड़क की स्थिति और भी खराब हो जाती है, जिससे आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. प्रतिभा कच्छप ने बताया कि खराब सड़क के कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा के कार्यों के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. खासकर बरसात के मौसम में आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है. इसी वजह से श्रमदान से सड़क बनाने में जुटे हैं. सड़क खराब है. गांव से बाहर आने-जाने में कठिनाई होती है. बरसात के दिनों में समस्या और बढ़ जाती है. उन्होंने कहा कि सिंजाग, आंबाटोली, उपरघाट और डांड़टोली के लोगों को पालकोट प्रखंड मुख्यालय पहुंचने में भारी परेशानी होती है.
प्रत्येक घरों से जुटाया गया 100-100 रुपये का चंदा
ग्रामीणों के अनुसार, सड़क निर्माण के लिए प्रत्येक घर से 100 रुपये का चंदा एकत्र किया गया है. महेश लोहरा ने बताया कि गांव के लोग आपसी सहयोग से घर-घर से 100-100 रुपये चंदा एकत्र कर सड़क निर्माण कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कई बार गांव में पक्की सड़क बनने की बात कही गयी, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है.
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विधायक ने दिया था सड़क निर्माण का आश्वासन
गांव के महेश लोहरा ने बताया कि कई बार जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रीय विधायक को सड़क निर्माण की मांग से अवगत कराया गया. विधायक ने गांव का दौरा कर सड़क निर्माण का आश्वासन भी दिया था, लेकिन अब तक कोई कार्य शुरू नहीं हो सका है. उन्होंने कहा कि कालीकरण सड़क बनने का दावा किया जाता है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है. मजबूरी में ग्रामीणों को स्वयं श्रमदान कर सड़क बनानी पड़ रही है.
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