आदिवासी छात्र संघ (आछासं) कुड़ुख सांस्कृतिक भवन बम्हनी गुमला में फकीरचंद भगत की अध्यक्षता में हुई. बैठक में निर्णय लिया गया कि सरना नहीं, तो जनगणना नहीं. इसलिए सरना धर्म कोड अविलंब लागू किया जाये. इसके साथ ही विधानसभा स्तरीय रैली का आयोजन करने तथा जनगणना से पहले धर्म की मांग की जायेगी तथा परिसीमन का विरोध किया जायेगा. सर्वप्रथम बिशुनपुर विधानसभा के घाघरा में रैली किया जायेगा. मौके पर वक्ताओं ने कहा कि सरना धर्म कोड अस्तित्व और पहचान का विषय है.
आदिवासियों के आरक्षण में कटौती की जा रही है
2011 के जनगणना में 10 करोड़ से अधिक आदिवासी जनसंख्या चिन्हित है. लेकिन इस समुदाय का अलग धर्म कॉलम नहीं है. यह चिंता की बात है. वक्ताओं ने कहा कि जब 44 लाख जैनी की आबादी को कॉलम दिया जा सकता है तो आदिवासी के लिए क्या नहीं. वक्ताओं ने कहा कि मनुवादी सोच के आधार पर असम के आदिवासियों और झारखंड सहित देश के अन्य राज्यों में निवास करने वाले आदिवासियों को गुलाम बनाना चाहते हैं और अस्तित्व को मिटाना चाहता है. षडयंत्र के तहत 1961 से ट्राइबल रिलीजन कॉलम को हटाया गया. धर्म कॉलम के अभाव में 90 प्रतिशत से अधिक आदिवासी जनसंख्या दूसरे धर्म कोड में लिखवाया जा रहा है. आदिवासियों के आरक्षण में कटौती की जा रही है. परिसीमन द्वारा विधायक व सांसद बीट को घटाया जा रहा है. आदिवासियों के बजट में आवंटित राशि को दूसरे के विकास में खर्च की जा रही है. वक्ताओं ने कहा कि आज पांचवीं अनुसूची में मिले संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी की जा रही है. इन सभी समस्याओं के निवारण के लिए रैली निकाली जायेगी. वहीं बैठक में गुमला प्रखंड आदिवासी छात्र संघ समिति का गठन किया गया. जिसमें अध्यक्ष राज मिंज, उपाध्यक्ष शत्रुध्न चीक बड़ाइक, सचिव राजेश मिंज, सह सचिव विरेंद्र बड़ाईक, कोषाध्यक्ष नंदकिशोर उरांव व सह कोषाध्यक्ष संध्या उरांव को बनाया गया.