गुमला में उग्रवादियों का तांडव, बसिया-सिसई सड़क निर्माण के लिए बने कैंप पर किया हमला, कई कर्मियों को पीटा

उग्रवादियों ने लेवी की मांग को लेकर सिसई व बसिया सड़क का निर्माण कार्य बंद करने की धमकी दी और कैंप में खड़ी गाड़ियों पर हमला कर दिया. उस वक्त कई कर्मचारी सो रहे थे.

गुमला : लंबे अरसे के बाद उग्रवादियों ने एक बार फिर गुमला जिले के बसिया में अपनी दस्तक दी है. बसिया व सिसई प्रखंड को जोड़ने वाली सड़क निर्माण के लिए बनाये गये कैंप पर उग्रवादियों ने हमला किया है. कई गाड़ियों का शीशा तोड़ डाले गये. कैंप में सो रहे कर्मचारियों को पीटा गया है. घटना मंगलवार की सुबह चार साढ़े चार बजे के बीच की बतायी जा रही है. सड़क की लागत 60 करोड़ रूपये से अधिक की है.

उग्रवादियों ने क्यों किया हमला

बताया जा रहा है कि अहले सुबह 10 से 12 की संख्या में हथियारबंद उग्रवादी आये थे. लेवी की मांग को लेकर सिसई व बसिया सड़क का निर्माण कार्य बंद करने की धमकी दी और कैंप में खड़ी गाड़ियों पर हमला कर दिया. उस वक्त कई कर्मचारी सो रहे थे. उग्रवादियों के पहुंचने के बाद सभी की नींद टूट गयी. इसके बाद उग्रवादियों ने सभी कर्मचारियों को घेरकर पीटने लगे. छह कर्मचारियों को चोट लगी है. बाकी कर्मचारी उग्रवादी हमला सुनते ही कैंप से भाग खड़े हुए. अभी तक कई फरार कर्मचारी कैंप में वापस नहीं लौटे हैं.

उग्रवादियों ने कितने रुपये लेवी की मांग की थी

यहां बता दें कि गुमला जिले के बसिया प्रखंड के पोकटा गांव के समीप विनोद जैन कंस्ट्रक्शन द्वारा पुल बनवाया जा रहा है. पुल का काम अधूरा है. सूचना के अनुसार उग्रवादियों ने 40 लाख रुपये लेवी की मांग की थी. लेवी नहीं मिलने के बाद मंगलवार की सुबह नारेकेला जंगल की ओर से एक दर्जन उग्रवादी पुल निर्माण स्थल के समीप बने कैंप पर पहुंचे और हमला कर दिया. इधर, घटना की सूचना पर बसिया अनुमंडल के एसडीपीओ मो नजीर, इंस्पेक्टर व थानेदार घटना स्थल पहुंचे. फिलहाल घायल कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है. सड़क निर्माण में लगे कर्मचारियों में दहशत का माहौल है.

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By Durjay paswan

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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