गुमला. नगर परिषद में रोचक मामला सामने आया है. काम हुआ नहीं, लेकिन राशि की मांग किये जाने का मामला सामने आया है. नगर परिषद के अधिकारी ने बिना काम किये नगर निगम से आठ लाख आठ हजार रुपये की मांग की है. वार्ड पार्षद दिलीप कुमार भगत ने इस पर गंभीर सवाल उठाते हुए नगर विकास एवं आवास विभाग के निदेशक से शिकायत की है.
8.08 लाख रुपये की प्रतिपूर्ति पर सवाल
श्री भगत ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) मिशन 2.0 के तहत आइइसी एवं प्रशासनिक मद में 8.08 लाख रुपये की प्रतिपूर्ति की मांग पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है. इस संबंध में उन्होंने नगर विकास एवं आवास विभाग, झारखंड के निदेशक को पत्र भेजा है.
पत्र में कहा गया है कि नगर परिषद की ओर से 6 अगस्त 2026 को विभाग को पत्र भेजकर वित्तीय वर्ष 2025-26 में पीएम आवास योजना के तहत आइइसी मद में 5.50 लाख रुपये की प्रतिपूर्ति की मांग की गयी है. इसमें प्रचार-प्रसार, गृह प्रवेश, लाभुकों के बीच सामग्री वितरण, पौधरोपण, आवास मेला और शिविर सहित अन्य गतिविधियों का उल्लेख किया गया है.
पार्षद ने कहा- धरातल पर नहीं हुआ काम
इसके अलावा प्रशासनिक मद में 2.58 लाख रुपये की प्रतिपूर्ति की मांग की गयी है. वार्ड पार्षद का आरोप है कि जिन कार्यों के नाम पर राशि की मांग की जा रही है, उनमें से कोई भी कार्य धरातल पर नहीं हुआ है. उन्होंने विभाग से मामले का भौतिक सत्यापन कराने का आग्रह किया है.
पार्षद ने कहा है कि सत्यापन में कार्य सही पाये जाने पर ही राशि का भुगतान किया जाये. गलत पाये जाने पर राशि की मांग पर रोक लगाते हुए संबंधित अधिकारी के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाये.
विभाग को गुमराह कर राशि मांगने का आरोप
पत्र में पार्षद ने आरोप लगाया है कि नगर परिषद प्रशासन द्वारा विभाग को गुमराह कर राशि की मांग की जा रही है. उन्होंने पूरे मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है.
इधर, नगर परिषद में शहरी विकास की हकीकत का मामला उजागर होने के बाद अब कई संगठन आंदोलन की तैयारी में हैं.
