गुमला के बाघमुंडा जलप्रपात की प्राकृति सौंदर्य को देखेंगे तो हो जाएंगे फिदा, जानें कैसे हुए इसका नामकरण
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 20 Dec 2021 1:29 PM
जंगल, नदी एवं पहाड़ के अद्भुत सुरम्य संगम के अस्तित्व में आया मनोहारी दृश्य जब सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हो तो समझ जाइये आप बाघमुंडा की हसीन वादियों की गोद में है.
जंगल, नदी एवं पहाड़ के अद्भुत सुरम्य संगम के अस्तित्व में आया मनोहारी दृश्य जब सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हो तो समझ जाइये आप बाघमुंडा की हसीन वादियों की गोद में है. बेख़ौफ़ हो कर दक्षिण कोयल नदी की इतराती धारा को अपने में समेटते जब पत्थरों के विशाल ढेर के बीच सात धाराओं में परिवर्तित करते तीन दिशाओं में बहने को मजबूर करता यह पिकनिक स्पॉट वाकई किसी को भी मंत्रमुग्ध करने की क्षमता रखता है.
यह एक बड़ा कारण हैं कि गर्मी, सर्दी ओर बरसात में से मौसम कोई भी हो. यहां सालों भर सैलानियों के तांता लगा रहता है. जबकि यह पिकनिक स्पॉट भौतिक सुख सुविधाओं की दृष्टि से यहां कुछ भी उपलब्ध कराने की स्थिति में नहीं है. इसके बावजूद यहां बड़ी संख्या में सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता अपनी नैसर्गिक के कारण यूं ही यह सबकुछ उपलब्ध करा जाता है.
इतना ही नहीं, इसके प्रवेश द्वार में स्थित प्राचीन शिव मंदिर, राह में स्थित महादेव कोना एवं पास में स्थित धनसिंग टोला जलाशय को जोड़ दें तो बनने वाले गोल्डन ट्राइंगल का आकर्षण इसे स्वतः विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल बनाने का बोध करने लगता है. यह मिनी कश्मीर से कम नहीं है. बाघमुंडा के आसपास का खूबसूरत वादियां, घने जंगल व ऊंचे पहाड़ है. हसीन वादियों के नाम से भी इसे जाना जाता है.
रांची-सिमडेगा मुख्य पथ पर बसिया एवं कामडारा के बीच केमताटोली में बाघमुंडा पर्यटन स्थल का प्रवेश द्वार बना है. वहां से तीन किलोमीटर अंदर बाघमुंडा है. यहां तक बाइक, कार के अलावा बस भी आसानी से पहुंच सकती हैं.
बाघमुंडा के आसपास का वातावरण साफ स्वच्छ है. नदी एवं पहाड़ होने के कारण यहां की चट्टानों में फिसलन ज्यादा है. एकांत एवं सुनसान होने के कारण यहां सुबह 7.00 बजे से शाम 4.00 बजे तक ही पिकनिक मनाया जा सकता है.
यहां पिकनिक मनाने के लिए या तो खुद से खाना बनाना होगा या फिर पांच किलोमीटर दूर बसिया के ढाबे से खाने की व्यवस्था करनी होगी. खाना बनाने के लिए सारा सामान ले कर ही आना होगा. क्योंकि यहां दुकानों की सुविधा उपलब्ध नहीं है.
बाघमुंडा जलप्रपात कोयल नदी की पत्थरों के विशाल ढेर के बीच सात धाराओं में परिवर्तित करते तीन अलग अलग दिशाओं में बहती है. पत्थर के इस विशाल ढेर के बीच एक पत्थर जो कि बाघ के सिर के आकार का है. इस पत्थर से टकराकर पानी नदी में गिरता है. इसी कारण इस जलप्रपात का नाम बाघमुंडा पड़ा. पुरानी कहानी के अनुसार इस जगह का नाम बाघमुंडा कहने के पीछे भी इतिहास है. कहा जाता है, कि नदी के बीच में अक्सर बाघ नजर आता था. इस कारण इस जगह का नाम बाघमुंडा पड़ गया. यहां एक मंदिर भी है.
एसडीपीओ विकास आनंद लागुरी : 9431931477
इंस्पेक्टर विनोद कुमार : 9304382300
थाना प्रभारी बसिया अनिल लिंडा : 7739647185
बीडीओ बसिया रविंद्र कुमार गुप्ता : 7352374447
प्रभात ख़बर कार्यालय गुमला : 7004243637
रांची से 100 किलोमीटर
गुमला से 50किमी
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