गुमला नगर परिषद अध्यक्ष और प्रशासक भिड़े, SC/ST थाने में शिकायत दर्ज, जानें मामला

Gumla Municipal Council: गुमला नगर परिषद में अधिकारियों और निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच ठन गयी है. रामनवमी की बैठक में शुरू हुआ विवाद अब थाने और डीसी की चौखट तक पहुंच गया. अध्यक्ष शकुंतला उरांव का आरोप है कि प्रशासक ने अपमान किया. जानें प्रशासक ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर क्या जवाब दिया है और विवादों की जड़ क्या है.

Gumla Municipal Council, गुमला (दुर्जय पासवान की रिपोर्ट) : नगर परिषद गुमला की पहली महिला अध्यक्ष शकुंतला उरांव और उपाध्यक्ष रमेश कुमार चीनी ने प्रशासक मनीष कुमार पर दुर्व्यवहार का गंभीर आरोप लगाया है. दोनों ने प्रशासक को गुमला से हटाने और उनके कार्यकाल में हुए कार्यों की जांच कराने की मांग की है. इस संबंध में उपायुक्त (DC) से लिखित शिकायत की गयी है.

रामनवमी की तैयारी के बीच बढ़ा विवाद

जानकारी के अनुसार, 27 मार्च को रामनवमी के मद्देनजर शहर की साफ-सफाई, जलापूर्ति और गैस आपूर्ति की व्यवस्था पर चर्चा के लिए अध्यक्ष ने प्रशासक को अपने चैंबर में बुलाया था. इसी दौरान बातचीत के बीच माहौल अचानक गरमा गया.

बैठक में हुआ हाई-वोल्टेज ड्रामा

अध्यक्ष का आरोप है कि प्रशासक बिना किसी औपचारिकता के सीधे कुर्सी पर बैठ गये और शहर के मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय उन्हें नियम-कानून समझाने लगे. चेयरमैन का दावा तो यह भी है कि प्रशासक ने गुमला नगर परिषद की अध्यक्ष से कहा, “आप नई हैं, आपको कुछ नहीं आता”. जैसे वाक्यों का प्रयोग किया जिससे विवाद और बढ़ गया.

उपाध्यक्ष ने भी उठाये सवाल

उपाध्यक्ष रमेश कुमार चीनी ने कहा कि प्रशासक के बोल जनता विरोधी थे. उन्होंने (प्रशासक ने) स्पष्ट कर दिया है कि वे महीने में सिर्फ एक दिन बोर्ड की बैठक के लिए आयेंगे, बाकी समय सरकारी काम करेंगे. उन्हें जनता की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है.

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एसटी/एससी थाना में भी शिकायत

मामला तूल पकड़ने के बाद अध्यक्ष ने गुमला एसटी/एससी थाने में भी लिखित शिकायत दर्ज करायी है. साथ ही, उपायुक्त को आवेदन देकर प्रशासक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गयी है.

प्रशासक ने आरोपों को नकारा

इस संबंध में प्रशासक मनीष कुमार ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कोई बड़ा विवाद नहीं हुआ है. उन्होंने सफाई दी कि अध्यक्ष नई हैं, इसलिए उन्हें केवल नियमों की जानकारी दी गयी थी. बिना नियमों के पालन के कोई भी सरकारी कार्य नहीं किया जा सकता.

12 दिन में ही आमने-सामने आए अधिकारी

गौरतलब है कि 14 मार्च को ही नगर परिषद के नए पदाधिकारियों ने शपथ ली थी. शपथ ग्रहण के महज 12 दिन के भीतर ही अध्यक्ष और प्रशासक के बीच शुरू हुए इस टकराव ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिये हैं.

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Published by: Sameer Oraon

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