गुमला में संतोष साहू के बाद अनुज साहू का पुतला बनाकर किया गया अंतिम संस्कार, बेबस पिता ने दी मुखाग्नि

अनुज साहू का पुतला बनाकर अंतिम संस्कार करते परिजन

Anuj Sahu Last Rites: तेलंगाना सुरंग हादसे में झारखंड के गुमला निवासी अनुज साहू की मौत के ढाई माह बाद भी शव नहीं मिलने पर परिजनों ने पुतला बनाकर आज मंगलवार को उसका अंतिम संस्कार कर दिया. हिंदू रीति-रिवाज से उसकी अंत्येष्टि की गयी. दो दिन पहले संतोष साहू का भी पुतला बनाकर अंतिम संस्कार किया गया.

Anuj Sahu Last Rites: गुमला, जगरनाथ पासवान-ढाई माह बाद भी बेटे का शव नहर की सुरंग से नहीं मिला. इसके बाद परिजनों ने अपने बेटे को मृत मानकर उसका पुतला बनाकर अंतिम संस्कार किया. गुमला जिले के घाघरा प्रखंड के खंभिया कुंबाटोली गांव के मजदूर अनुज साहू की ढाई माह पहले तेलंगाना के नागरकुरनूल जिले में नहर निर्माण के दौरान सुरंग धंसने से मौत हो गयी थी. ढाई माह तक तेलंगाना सरकार शव की तलाश करती रही. जब शव नहीं मिला तो सरकार ने भी अनुज साहू को मृत मान लिया. मुआवजा के रूप में तेलंगाना सरकार ने परिजनों को 25 लाख रुपए दिए.

हिंदू रीति-रिवाज से किया गया अंतिम संस्कार


हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार अनुज साहू को मृत मानकर परिजनों ने आज मंगलवार को श्मशान घाट में अंतिम संस्कार कर दिया. अंतिम संस्कार में गांव के लोग और रिश्तेदार शामिल हुए. अनुज के पिता रामप्रताप साहू ने मुखाग्नि दी. पुतला बनाकर शव यात्रा घर से शुरू होकर बाकी नदी मुक्ति घाट पहुंची. इस दौरान मां सहित परिजनों की रो-रोकर बुरा हाल था. महिलाओं और बच्चों के कंद्रन से गांव का माहौल गमगीन हो उठा.

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अंतिम संस्कार में हुए शामिल


अनुज साहू का मानव आकृति का पुतला बनाया गया था. पुतला में अनुज की तस्वीर भी लगी थी. अंतिम संस्कार में अनुज के दादा चमार साहू, बड़े पिता सुरेश साहू, शिवनाथ साहू, महली साहू, महरंग साहू, रमेश साहू, शंकर साहू, धर्मा साहू, छोटू साहू, दिग्विजय साहू, अरुण साहू, पति साहू, चंद्रपति साहू सहित ग्रामीण व परिजन शामिल थे.

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संतोष का भी पुतला बनाकर किया गया था अंतिम संस्कार


गुमला के तिर्रा गांव निवासी मजदूर संतोष साहू का भी पुतला बनाकर अंतिम संस्कार किया गया था. संतोष भी टनल हादसे में फंसा था. शव नहीं मिलने के बाद परिजनों ने पुतला बनाकर उसका अंतिम संस्कार दो दिन पहले किया था.

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लेखक के बारे में

By Guru swarup mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.
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