गुमला: आदिवासी बहुल जिला है. यहां की परंपरा अनूठी है. संस्कृति दिल को छूती है. यहां की वेशभूषा अक्सर लोगों को आकर्षित करती है. यही वजह है. इसबार आदिवासी दिवस भी गुमला में एक अलग अंदाज में प्रशासन ने मनाया. सीधे शब्दों में कहा जाये. प्रशासन ने अनूठे तरीके से आदिवासी दिवस मनाकर इतिहास बनाया है.
जिले के सभी अधिकारी आदिवासी वेशभूषा में नजर आये. अधिकारियों की पहनावा मुख्य चर्चा का विषय रहा. लोगों ने अधिकारियों की पहनावा की प्रशंसा की. साथ ही जिस अंदाज व भव्यता से आदिवासी दिवस मना. इसकी भी प्रशंसा हुई है.
प्रशासन का कार्यक्रम था. झारखंड आदिवासी महोत्सव. यह महोत्सव गुमला की उस सांस्कृतिक पहचान को एक बार फिर जीवंत किया. जिसमें मांदर की थाप केवल संगीत नहीं, बल्कि परंपरा की आवाज है.
लोकनृत्य केवल प्रस्तुति नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही विरासत है. जल, जंगल, जमीन केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन एवं अस्तित्व का आधार है. नगर भवन में महोत्सव हुआ. जिले के सभी प्रशासनिक अधिकारी थे. मांदर की थाप, झारखंडी गीतों की गूंज और पारंपरिक नृत्यों ने सभी का मनमोह लिया.
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