4.42 करोड़ के गबन मामले में पुलिस की जांच शुरू

Published at :02 Nov 2017 12:33 PM (IST)
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4.42 करोड़ के गबन मामले में पुलिस की जांच शुरू

गुमला: दी गुमला-सिमडेगा को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड बिशुनपुर शाखा में चार करोड़ 42 लाख 76 हजार 260 रुपये के गबन मामले की बिशुनपुर थाना की पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने के बाद जांच शुरू कर दी है. थाना प्रभारी मणिलाल राणा ने कहा कि प्रक्रिया के अनुसार अनुसंधान शुरू कर दिया गया है. सुपरविजन के बाद […]

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गुमला: दी गुमला-सिमडेगा को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड बिशुनपुर शाखा में चार करोड़ 42 लाख 76 हजार 260 रुपये के गबन मामले की बिशुनपुर थाना की पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने के बाद जांच शुरू कर दी है.

थाना प्रभारी मणिलाल राणा ने कहा कि प्रक्रिया के अनुसार अनुसंधान शुरू कर दिया गया है. सुपरविजन के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा जायेगा. ज्ञात हो कि बैंक के तत्कालीन मैनेजर मनोज कुमार गुप्ता के खिलाफ सोमवार को बैंक के लेखा प्रबंधक राजेश कुमार तिवारी ने बिशुनपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी थी. जिसमें उन्होंने श्री गुप्ता पर बैंक के अभिलेखों में छेड़छाड़ करने, धोखाधड़ी करने, राशि गबन करने व बैंक के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया है. श्री गुप्ता प्रभारी शाखा प्रबंधक के रूप में 25 अप्रैल 2009 से लेकर 20 जुलाई 2014 तक थे. इस दौरान उन्होंने मोटी रकम गबन किया है. दर्ज केस में श्री तिवारी ने गबन की रकम का पूरा विवरण दिया है.

गबन का विवरण इस प्रकार है : तत्कालीन प्रभारी शाखा प्रबंधक मनोज कुमार गुप्ता द्वारा 31 मार्च 2012 के वार्षिक लेखाबंदी के अंकेक्षित तुलनपत्र में बैंक के प्रधान कार्यालय में एक करोड़ 68 लाख 52 हजार 349 रुपये जमा दिखाया गया है. जबकि प्रधान कार्यालय में 90 लाख 19 हजार 799 रुपये ही जमा हुआ था. इस प्रकार 78 लाख 32 हजार 557 रुपये का अंतर पाया गया है.

31 मार्च 2013 के अंकेक्षित तुलनपत्र में प्रधान कार्यालय के खाता में दो करोड़ 11 लाख 57 हजार 271 रुपये जमा दिखाया गया है, जबकि उक्त तिथि को बिशुनपुर शाखा पर प्रधान कार्यालय का ही 49 लाख 59 हजार 316 रुपये का बकाया था. अंतर राशि बढ़ कर दो करोड़ 61 लाख 16 हजार 587 रुपया हो गया है.

31 मार्च 2014 के तुलनपत्र में मुख्यालय शीर्ष में एक करोड़ 66 लाख 51 हजार 57 रुपये जमा दिखाया गया है, जबकि वास्तव में मुख्यालय शीर्ष में बिशुनपुर शाखा का कोई जमा नहीं था, बल्कि जमाकर्ता को भुगतान के लिए प्रधान कार्यालय द्वारा एक करोड़ 66 लाख 51 हजार 57 रुपये दिया गया था.

31 मार्च 2014 के अंकेक्षित तुलनपत्र के विभिन्न शीर्षों द्वारा एक करोड़ 50 लाख 12 हजार 264 रुपये की निकासी दिखायी गयी है. इस प्रकार जांच टीम द्वारा कुल चार करोड़ 42 लाख 76 हजार 260 रुपये का गबन का मामला सामने आया है.

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