गोड्डा से निरभ किशोर की रिपोर्ट
Godda News: गोड्डा कॉलेज के उर्दू, समाजशास्त्र, मानव शास्त्र, दर्शनशास्त्र और साइकोलॉजी के स्टूडेंट द्वारा धरना प्रदर्शन किया जा रहा है. झारखंड सरकार ने रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर गोड्डा कॉलेज में उर्दू विभाग सहित पांच विषयों की पढ़ाई स्थगित कर दी है. कॉलेज में इन विषयों में सैकड़ो विद्यार्थी पढ़ते थे. इधर हाल के वर्षों में विद्यार्थियों की संख्या में कुछ कमी आई है. कारण बीच-बीच में प्राध्यापकों की कमी, कुछ गैर सरकारी कॉलेज में पढ़ाई एवं परीक्षा में अवैध छूट होना है. गोड्डा कॉलेज में 75% उपस्थिति अनिवार्य है. साथ ही यहां परीक्षा भी बहुत कड़ाई के साथ होती है. इस वजह से केवल सीरियस विद्यार्थी ही गोड्डा कॉलेज में पढ़ते हैं. विद्यार्थियों की कमी को देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग झारखंड सरकार ने इन विषयों की पढ़ाई ही स्थगित कर दी है.
1954 से शिक्षा का अहम केंद्र
गोड्डा कॉलेज की स्थापना वर्ष 1954 में हुई थी. कॉलेज ने बड़ी संख्या में अपने विद्यार्थियों को अधिकारी, वकील और कई बड़े पदों पर सुशोभित करने में सहायता की है. गोड्डा और आसपास के क्षेत्रों में इस कॉलेज की एक अलग पहचान और प्रतिष्ठा रही है.
शिक्षकों ने भी जताई चिंता
गोड्डा कॉलेज में स्नातकोत्तर की भी पढ़ाई होती है. इस कारण विद्यार्थियों को यहां की पढ़ाई, लाइब्रेरी और लैबोरेट्री से फायदा मिलता है. साथ ही यहां के विद्यार्थी रिसर्च से भी जुड़े रहते हैं. गोड्डा और आसपास के ग्रामीण और गरीब बच्चे गोड्डा कॉलेज की पढ़ाई से लाभान्वित होते रहे हैं. गोड्डा कॉलेज के समाजशास्त्र की प्रोफेसर का कहना है कि क्वांटिटी के आधार पर क्वालिटी को नजर अंदाज करना उच्च शिक्षा से जुड़े अधिकारियों की दूरदर्शिता नहीं है.
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