Godda News: गोड्डा के सनौर गांव की गेरुवा नदी में दिखा 10 फीट का मगरमच्छ, गांव में दहशत

Godda News: गोड्डा के सनौर गांव स्थित गेरुवा नदी में 10 से 12 फीट लंबे मगरमच्छ के दिखने से दहशत फैल गई. वन विभाग ने रेस्क्यू अभियान शुरू कर लोगों को नदी से दूर रहने की सलाह दी है. माइकिंग के जरिए ग्रामीणों और पशुपालकों को सतर्क किया जा रहा है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

गोड्डा के सनौर गांव से निरभ किशोर की रिपोर्ट

Godda News: झारखंड के गोड्डा जिले के सनौर गांव से गुजरने वाली गेरुवा नदी में एक विशालकाय मगरमच्छ दिखाई देने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है. ग्रामीणों के अनुसार मगरमच्छ की लंबाई करीब 10 से 12 फीट है. नदी में मगरमच्छ के दिखने की खबर फैलते ही आसपास के गांवों में दहशत का माहौल बन गया. सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ने के लिए रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया.

नहाने गए ग्रामीणों ने सबसे पहले देखा मगरमच्छ

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गुरुवार सुबह करीब आठ बजे कुछ ग्रामीण गेरुवा नदी में नहाने के लिए पहुंचे थे. इसी दौरान उनकी नजर नदी के बीचोंबीच तैर रहे एक विशाल मगरमच्छ पर पड़ी. मगरमच्छ का आकार देखकर लोग घबरा गए और तुरंत इसकी सूचना गांव के अन्य लोगों को दी. कुछ ही देर में यह खबर पूरे इलाके में फैल गई. सनौर गांव के अलावा बसंतराय और आसपास के कई गांवों के लोग नदी किनारे पहुंचने लगे. हालांकि ग्रामीणों ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लोगों को नदी से दूर रहने की सलाह दी.

गांवों में फैला भय का माहौल

मगरमच्छ दिखाई देने के बाद ग्रामीणों में डर का माहौल है. कई लोग रोजमर्रा के कार्यों के लिए नदी पर निर्भर रहते हैं. ऐसे में नदी में मगरमच्छ की मौजूदगी लोगों के लिए चिंता का कारण बन गई है. ग्रामीणों का कहना है कि पहले कभी इस क्षेत्र में इतना बड़ा मगरमच्छ नहीं देखा गया था. खासकर बच्चों और पशुपालकों को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई है. नदी किनारे चरने जाने वाले मवेशियों की सुरक्षा को लेकर भी ग्रामीण सतर्क हो गए हैं.

वन विभाग ने शुरू किया रेस्क्यू अभियान

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची. विभाग के अधिकारियों और कर्मियों ने नदी के आसपास निगरानी बढ़ा दी है. मगरमच्छ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए नदी के दोनों किनारों पर गश्त की जा रही है. वन विभाग की टीम लगातार मगरमच्छ को सुरक्षित तरीके से पकड़ने की कोशिश कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि रेस्क्यू अभियान पूरी सावधानी के साथ चलाया जा रहा है ताकि मगरमच्छ और लोगों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

माइकिंग कर लोगों को किया जा रहा सतर्क

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने आसपास के गांवों में माइकिंग भी शुरू कर दी है. लोगों से अपील की जा रही है कि वे फिलहाल नदी के पास न जाएं और बच्चों को भी नदी किनारे जाने से रोकें. इसके अलावा पशुपालकों को अपने मवेशियों को नदी के आसपास नहीं ले जाने की सलाह दी गई है. विभाग का मानना है कि सावधानी बरतकर किसी भी संभावित दुर्घटना से बचा जा सकता है.

गर्मी और घटते जलस्तर को माना जा रहा कारण

फोरेस्टर राजीव कुमार ने बताया कि गर्मी के मौसम में कई जलाशयों और नदियों का जलस्तर कम हो जाता है. ऐसी स्थिति में मगरमच्छ भोजन और पर्याप्त पानी की तलाश में नए क्षेत्रों की ओर बढ़ जाते हैं. संभवतः यही कारण है कि यह मगरमच्छ गेरुवा नदी के इस हिस्से तक पहुंच गया है. उन्होंने कहा कि वन विभाग की टीम मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़कर किसी उपयुक्त जलाशय में छोड़ने की तैयारी कर रही है. साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें.

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सतर्कता बरतने की अपील

वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जब तक मगरमच्छ को सुरक्षित रूप से रेस्क्यू नहीं कर लिया जाता, तब तक लोग नदी किनारे जाने से बचें. विभाग ने ग्रामीणों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि किसी भी प्रकार की जानकारी मिलने पर तुरंत वन विभाग को सूचित करें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके.

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लेखक के बारे में

Published by: KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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