गिरिडीह. जिले की प्रसिद्ध व्यावसायिक मंडी सरिया में इन दिनों जमीन के कारोबार को लेकर तरह-तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि शहर और आसपास के इलाकों में फर्जी दस्तावेजों के सहारे जमीन की खरीद-बिक्री करने वाले कथित प्रॉपर्टी डीलरों का नेटवर्क सक्रिय है. इसका सबसे अधिक असर गरीब, कमजोर और बाहर रहने वाले जमीन मालिकों पर पड़ रहा है.
लोगों के अनुसार, जमीन के पुराने रिकॉर्ड और दस्तावेजों में हेरफेर कर जमीन पर दावा करने, फर्जी कागजात के आधार पर बिक्री करने और एक ही जमीन को अलग-अलग लोगों को बेचने जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं. इससे जमीन विवाद बढ़ रहे हैं और कई मामलों में विवाद हिंसक झड़प तक पहुंच जाते हैं.
बंगाली परिवारों की कोठियों से थी सरिया की अलग पहचान
हजारीबाग रोड रेलवे स्टेशन के पास बसा सरिया कभी अपने शांत वातावरण और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता था. करीब 1940 के आसपास यहां कई संभ्रांत बंगाली परिवारों ने अपना बसेरा बनाया था. उनकी बड़ी-बड़ी कोठियां और बगीचे सरिया की पहचान हुआ करते थे.
ये भी पढ़ें: बगोदर के घाघरा गांव में डकैती, हथियार का भय दिखाकर परिवार को बनाया बंधक; लाखों की लूट
स्थानीय लोगों के अनुसार, दुर्गा पूजा और बसंत पंचमी जैसे अवसरों पर बंगाली परिवार यहां छुट्टियां बिताने पहुंचते थे. उस समय सरिया बाजार में विशेष चहल-पहल रहती थी. बंगाल और बिहार की मिश्रित संस्कृति ने इस इलाके को अलग पहचान दी थी.
कई पुरानी कोठियां आज भी सरिया के अतीत की याद दिलाती हैं. हालांकि, समय के साथ इनमें से कई का अस्तित्व खत्म हो गया. स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ कोठियों को बेच दिया गया और बाद में उन्हें तोड़कर या जमीन का स्वरूप बदलकर प्लॉटिंग की गयी.
ऐतिहासिक कोठियों पर भी जमीन कारोबारियों की नजर
सरिया की पुरानी कोठियां सिर्फ मकान नहीं थीं, बल्कि यहां की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा मानी जाती थीं. स्थानीय लोगों के मुताबिक, रखरखाव के अभाव में कुछ बंगाली परिवारों ने अपनी संपत्तियां बेच दीं और यहां से चले गये. वहीं कुछ अन्य संपत्तियों पर जमीन कारोबार से जुड़े लोगों की नजर पड़ गयी.
आरोप है कि कुछ संपत्तियों को कम कीमत पर खरीदने के बाद उनका व्यावसायिक उपयोग किया गया. कई जगह पुराने भवनों को हटाकर जमीन को छोटे-छोटे प्लॉट में बांटकर बेचने की बात भी सामने आती है.
सरिया में आनंद भवन आश्रम, मौनी बाबा आश्रम, केस्टो काली यानी दुर्गाबाड़ी काली मंदिर, वसु श्री कोठी समेत कुछ ऐतिहासिक स्थल आज भी इस पुराने दौर की यादों को संजोये हुए हैं.
फर्जी दस्तावेजों से जमीन बेचने का आरोप
स्थानीय लोगों का दावा है कि करीब 25 हजार की आबादी वाले सरिया नगर क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री का कारोबार तेजी से बढ़ा है. लोगों का आरोप है कि कई लोग बिना आवश्यक नियामकीय प्रक्रिया के प्रॉपर्टी डीलिंग में सक्रिय हैं.
शिकायतों में फर्जी कागजात, वसीयत और रसीद तैयार करने, पुराने भूमि रिकॉर्ड में बदलाव करने और फर्जी डीड के जरिये जमीन को अपना बताकर बेचने जैसे आरोप शामिल हैं. स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि कुछ मामलों में जमीन का अवैध दाखिल-खारिज कराने की शिकायतें भी सामने आती हैं.
लोगों का आरोप है कि जमीन कारोबार में स्थानीय दलालों के साथ कुछ प्रभावशाली लोगों का नेटवर्क काम करता है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
कमजोर और बाहर रहने वाले जमीन मालिक बन रहे निशाना
स्थानीय लोगों के अनुसार, जमीन कारोबार से जुड़े कुछ लोग ऐसी संपत्तियों को निशाना बनाते हैं, जिनके मालिक बुजुर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर या लंबे समय से बाहर रह रहे हैं. आरोप है कि ऐसी जमीनों की जानकारी जुटाकर वहां अवैध रूप से प्लॉटिंग शुरू कर दी जाती है.
जमीन मालिक को इसकी जानकारी मिलने के बाद जब वह मौके पर पहुंचता है तो विवाद की स्थिति बन जाती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि कई मामलों में समझौते के नाम पर जमीन मालिक को कुछ राशि देकर मामला खत्म करने का दबाव बनाया जाता है. वहीं, जमीन पर दावा करने पर मारपीट और धमकी जैसी घटनाओं के आरोप भी सामने आते रहे हैं.
जमीन विवाद से बढ़ रही लोगों की परेशानी
सरिया में जमीन से जुड़े विवादों को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ रही है. लोगों का कहना है कि जमीन की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता नहीं होने से वास्तविक जमीन मालिक और खरीदार दोनों परेशानी में पड़ सकते हैं.
ये भी पढ़ें: गिरिडीह के चिलगा में जमीन धंसने और ब्लास्टिंग से दहशत, घरों में गिर रहे पत्थर
स्थानीय लोगों के बीच यह दावा भी किया जाता है कि थाना क्षेत्र में दर्ज होने वाले मामलों में बड़ी संख्या जमीन विवाद से संबंधित होती है. हालांकि, जमीन से जुड़े कुल मामलों में 75 प्रतिशत मामले होने के दावे की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है.
प्रशासन से पारदर्शी जांच और कार्रवाई की मांग
पीड़ित जमीन मालिकों और किसानों का कहना है कि जमीन विवाद होने पर वे संबंधित अंचल और प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालयों का चक्कर लगाते हैं. उनका आरोप है कि प्रक्रिया लंबी होने के कारण कई लोग थक-हारकर समझौता करने को मजबूर हो जाते हैं.
स्थानीय लोगों ने जमीन के रिकॉर्ड की जांच, संदिग्ध दस्तावेजों की सत्यता की पड़ताल और अवैध प्लॉटिंग पर कार्रवाई की मांग की है. लोगों का कहना है कि जमीन से जुड़े मामलों में त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई होने से गरीब और कमजोर जमीन मालिकों को राहत मिल सकती है.
सरिया की पुरानी पहचान और ऐतिहासिक संपत्तियों को बचाने के साथ-साथ जमीन के कारोबार में पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी अब बड़ी चुनौती बनता जा रहा है.
