मांझीडीह स्वास्थ्य उपकेंद्र बदहाल, डॉक्टर की नियमित तैनाती नहीं; सीएचओ के भरोसे पांच हजार आबादी

गिरिडीह के मांझीडीह स्वास्थ्य उपकेंद्र में डॉक्टर नहीं होने से 5 हजार की आबादी परेशान है. केंद्र सीएचओ के भरोसे चल रहा है, जिससे ग्रामीणों को परेशानी हो रही है.

पीरटांड़. गिरिडीह-डुमरी मुख्य पथ पर स्थित मांझीडीह का प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र इन दिनों बदहाली का शिकार है. करीब पांच हजार की आबादी को सुलभ स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लाखों रुपये की लागत से बनाए गए इस केंद्र में नियमित चिकित्सक की पदस्थापना नहीं होने से ग्रामीणों को अपेक्षित स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पा रही है. फिलहाल केंद्र मुख्य रूप से सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) के भरोसे संचालित हो रहा है.

पीरटांड़ प्रखंड मुख्यालय और कुम्हरलालो पंचायत के बीच ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस उपकेंद्र का निर्माण कराया गया था. मकसद था कि आसपास के ग्रामीणों को छोटी-बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए प्रखंड मुख्यालय तक नहीं जाना पड़े. लेकिन नियमित चिकित्सक की व्यवस्था नहीं होने से उपकेंद्र का उद्देश्य अधूरा रह गया है.

दर्जनों गांवों के मरीजों को उठानी पड़ रही परेशानी

मांझीडीह के अलावा पूरनानगर, पांडेयडीह, दूधीमाटी, झरहा, दीवानडीह, बरमसिया समेत आसपास के दर्जनों गांवों के लोग इस स्वास्थ्य उपकेंद्र पर निर्भर हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यहां नियमित चिकित्सक नहीं रहने के कारण गंभीर बीमारी, जांच और आवश्यक उपचार के लिए उन्हें पीरटांड़ या दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों का रुख करना पड़ता है.

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इससे मरीजों और उनके परिजनों को समय के साथ आर्थिक परेशानी भी उठानी पड़ती है. ग्रामीणों का कहना है कि उपकेंद्र में नियमित चिकित्सक के साथ आवश्यक जांच की सुविधा और पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध करा दी जाएं तो आसपास के हजारों लोगों को राहत मिल सकती है.

ग्रामीणों के अनुसार, सिर्फ भवन तैयार कर देना पर्याप्त नहीं है. स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर, दवा, जांच और अन्य जरूरी संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित होनी चाहिए.

सीएचओ के भरोसे मिल रही प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा

बीपीएम सरिता कुमारी ने बताया कि पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों की पोस्टिंग नहीं होने के कारण यहां डॉक्टर नियमित रूप से नहीं जा पाते हैं. स्वास्थ्य उपकेंद्र में सीएचओ प्रतिदिन सुबह नौ बजे से दोपहर तीन बजे तक उपस्थित रहती हैं और उनके स्तर से मिलने वाली प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करायी जाती हैं.

फिलहाल केंद्र में सीएचओ के स्तर पर दी जाने वाली सामान्य दवाइयां उपलब्ध रहती हैं. ग्रामीणों की मांग है कि उपकेंद्र में नियमित चिकित्सक की पदस्थापना के साथ पर्याप्त मात्रा में जरूरी दवाइयां, जांच की सुविधा और अन्य स्वास्थ्य संसाधन उपलब्ध कराए जाएं.

नए स्वास्थ्य केंद्रों से पहले संसाधनों पर जोर देने की मांग

पीरटांड़ प्रखंड में कई अन्य हेल्थ सब सेंटर का निर्माण भी चल रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि नए भवन बनाने के साथ पुराने और नवनिर्मित स्वास्थ्य केंद्रों में नियमित चिकित्सकों की तैनाती और जरूरी संसाधनों की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए. तभी ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने का उद्देश्य पूरी तरह धरातल पर उतर सकेगा.

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By Bhola pathak

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