गिरिडीह: बिजली विभाग की कथित लापरवाही से महिला होमगार्ड की मौत के मामले में कोर्ट के आदेश के बावजूद मुआवजा राशि का भुगतान नहीं करना झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड को भारी पड़ गया। मुआवजा राशि का भुगतान नहीं होने पर गिरिडीह सिविल कोर्ट ने निगम के आइसीआइसीआइ बैंक में संचालित खाते को अटैच करने का आदेश दिया है। साथ ही मृतका के पुत्र को ब्याज समेत 12 लाख 48 हजार 109 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है।
2006 में बिजली पोल गिरने से हुई थी मौत
मामला वर्ष 2006 का है। जानकारी के अनुसार, 30 अप्रैल 2006 को महिला होमगार्ड आशा चौरसिया लखारी में एक चापाकल के पास नहा रही थीं। इसी दौरान लकड़ी का बिजली पोल उनके ऊपर गिर गया। बिजली तार की चपेट में आने से करंट लगने के कारण उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गयी।
घटना के बाद मृतका के पुत्र संतोष चौरसिया ने वर्ष 2009 में मुआवजे की मांग को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया।
2017 में पांच लाख रुपये मुआवजे का आदेश
मृतका के परिवार की ओर से मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता पवन कुमार ने बताया कि सुनवाई के बाद तत्कालीन सिविल जज एसके महाराज ने 28 अगस्त 2017 को झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड को संतोष चौरसिया को पांच लाख रुपये नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया था।
अधिवक्ता के अनुसार, अदालत के आदेश के बावजूद बिजली विभाग ने मुआवजा राशि का भुगतान नहीं किया। इसके बाद संतोष चौरसिया ने गिरिडीह सिविल जज की अदालत में एक्सक्यूशन केस दायर किया।
भुगतान तक बैंक खाता रहेगा अटैच
मामले में सिविल जज सीनियर डिवीजन चतुर्थ ने सख्त रुख अपनाते हुए झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड के आइसीआइसीआइ बैंक में संचालित खाते को अटैच करने का आदेश दिया। अदालत ने निगम को ब्याज समेत कुल 12 लाख 48 हजार 109 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है।
अधिवक्ता पवन कुमार ने बताया कि कोर्ट के आदेश के बाद झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड का संबंधित बैंक खाता फ्रीज हो गया है। जब तक मृतका के पुत्र को ब्याज समेत पूरी राशि का भुगतान नहीं कर दिया जाता, तब तक खाता फ्रीज रहेगा।
