गढ़वा : NH-75 पर मेराल फ्लाईओवर के पास वाहन की चपेट में आकर युवक की मौत

गढ़वा-विंढमगंज एनएच-75 पर मेराल फ्लाईओवर के पास एक युवक की वाहन की चपेट में आने से मौत हो गई। परिजनों ने साजिश की आशंका जताते हुए पुलिस से जांच की मांग की है।

संजय कुमार तिवारी की रिपोर्ट

मेराल (गढ़वा). गढ़वा-विंढमगंज एनएच-75 पर मेराल फ्लाईओवर के पिलर नंबर 25 के पास बुधवार को वाहन की चपेट में आने से 20 वर्षीय रंजीत कुमार की मौत हो गई. मृतक गढ़वा थाना क्षेत्र के खजूरी गांव निवासी प्रमोद राम का पुत्र था. घटना की सूचना मिलते ही मेराल पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए गढ़वा सदर अस्पताल भेज दिया. पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया.

घटना की जांच की मांग

मृतक के माता-पिता प्रमोद राम और कुंती देवी ने मेराल थाना में लिखित आवेदन देकर घटना की जांच की मांग की है. आवेदन में बताया गया है कि रंजीत खजूरी स्थित ब्रह्मस्थान पार्किंग यार्ड में संचालक आकाश शुक्ला के लिए गाड़ी पकड़ने का काम करता था. बुधवार को भी वह अपने सहयोगी आनंद कुमार पासवान के साथ गाड़ी पकड़ने के लिए निकला था. इसके बाद वह मेराल फ्लाईओवर तक कैसे पहुंचा, इसकी जानकारी परिजनों को नहीं है.

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जानबूझकर मारी हो टक्कर

परिजनों ने आवेदन में आशंका जताई है कि रंजीत को किसी वाहन ने जानबूझकर टक्कर मारी हो सकती है. उन्होंने पुलिस से मामले की गंभीरता से जांच कर घटना की वास्तविक वजह सामने लाने की मांग की है.पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और घटना के कारणों का पता लगाने में जुटी है.

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By Avinash Singh

अविनाश कुमार सिंह प्रभात खबर के गढ़वा ब्यूरो चीफ हैं. वह आंचलिक से लेकर राज्य मुख्यालय तक 27 वर्ष से अधिक की पत्रकारिता का अनुभव रखते हैं. राजनीतिक विश्लेषण, क्राइम रिपोर्टिंग, हाई-प्रोफाइल इंटरव्यू और खोजी पत्रकारिता.में इन्हें महारत हासिल है. अविनाश कुमार सिंह झारखंड की पत्रकारिता और 'प्रभात खबर' के विश्वसनीय चेहरा हैं, जिन्होंने खबरों की गुणवत्ता को हमेशा प्राथमिकता दी है. लगभग तीन दशकों (27 वर्ष) के अपने लंबे सफर में उन्होंने पलामू ब्यूरो प्रमुख के रूप में 10 साल से अधिक समय तक नेतृत्व किया. इसके बाद प्रदेश मुख्यालय (रांची) में काम करते हुए, विशेषकर वर्ष 2024 के चुनावों के दौरान, उनके सटीक चुनावी विश्लेषण और राजनीतिक रिपोर्टिंग ने काफी प्रभाव छोड़ा.उनकी लेखनी का दायरा बेहद व्यापक है—संवेदनशील क्राइम रिपोर्टिंग से लेकर प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के इंटरव्यू तक, उनकी हर खबर चर्चा में रही है. पत्रकारिता के माध्यम से कई बड़े मामलों का उद्भेदन करना उनकी विशेष पहचान है.झारखंड राज्य गठन के बाद अविनाश ने पलामू में काम करते हुये राजनीतिक से जुड़ी कई ऐसी खबर को ब्रेक किया ,जिसका असर राज्य की राजनीतिक पड़ा .प्रयोगधर्मी पत्रकार के रूप में भी इनकी पहचान है .संस्थान के प्रति समर्पण के लिए उन्हें 'बेस्ट एम्प्लोयी' जैसे पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है. प्रभात खबर के संघर्ष से लेकर इसके विकास और उत्थान के सफर में अविनाश एक सक्रिय सहभागी और सहयात्री रहे हैं.

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