गढ़वा में 14,331 ने नाम जोड़ने और 8,528 ने मतदाता सूची में सुधार के लिए दिया आवेदन

गढ़वा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में नाम जोड़ने के लिए 14,331 आवेदन आए हैं, जबकि 8,528 आवेदन सुधार के लिए प्राप्त हुए हैं. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कागजात न होने पर भी पारिवारिक संबंध के आधार पर नाम जोड़ने के निर्देश दिए हैं.

गढ़वा: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के अधिकारियों के साथ समीक्षा की. इस दौरान गढ़वा समेत सभी जिलों में चल रही सुनवाई और पुनरीक्षण कार्य की स्थिति की जानकारी ली गई. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सुनवाई के दौरान मतदाताओं से किसी खास या अतिरिक्त कागजात की मांग नहीं की जाए. उपलब्ध कागजात के आधार पर पात्रता की जांच कर नियमानुसार निर्णय लिया जाए.

गढ़वा में नाम जोड़ने के साथ सुधार के भी बड़ी संख्या में आवेदन

गढ़वा और भवनाथपुर विधानसभा क्षेत्र में 12 सितंबर तक नये नाम जोड़ने के लिए 14,331 आवेदन मिले हैं. वहीं मतदाता सूची में नाम, पता या अन्य जानकारी में सुधार के लिए 8,528 आवेदन और नाम हटाने के लिए 71 आवेदन प्राप्त हुए हैं. गढ़वा विधानसभा क्षेत्र में नाम जोड़ने के 6,873 और सुधार के 2,915 आवेदन मिले हैं. वहीं भवनाथपुर विधानसभा क्षेत्र में नाम जोड़ने के 6,924 और सुधार के 5,111 आवेदन प्राप्त हुए हैं.

11 सितंबर को भी दोनों विधानसभा क्षेत्रों में एक ही दिन 1,042 आवेदन मिले थे. इनमें 534 नये नाम जोड़ने और 502 मतदाता सूची में सुधार से संबंधित थे. इससे एसआईआर के दौरान गढ़वा में नए नाम जोड़ने के साथ मतदाता सूची में पुराने रिकॉर्ड को दुरुस्त करने की प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है.

कागजात नहीं होने पर पारिवारिक संबंध के आधार पर जांच

समीक्षा बैठक में ऐसे वृद्ध मतदाताओं से जुड़े मामले भी सामने आए, जिनके पास अपना कोई कागजात नहीं है. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि पात्र भारतीय नागरिकों के मामले में उनके बच्चों या नाती-पोतों के माध्यम से पारिवारिक संबंध की जांच कर नाम जोड़ने की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है.

वहीं ससुराल में रहने वाली ऐसी महिला मतदाता, जिसके पास अपने कागजात उपलब्ध नहीं हैं, उसके मामले में माता-पिता से संबंधित जानकारी के आधार पर जांच की जा सकती है. पात्रता सही पाए जाने पर माता-पिता या भाई-बहन के उपलब्ध मान्य कागजात के आधार पर प्रक्रिया पूरी की जा सकती है.

केवल सक्षम पदाधिकारी की वंशावली होगी मान्य

वंशावली को लेकर भी मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि केवल सक्षम पदाधिकारी या अंचल अधिकारी के स्तर से जारी वंशावली अथवा पारिवारिक सूची ही मान्य होगी. मुखिया स्तर से जारी वंशावली मान्य नहीं होगी.

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बूथ स्तर के कर्मचारियों के काम की रोज समीक्षा का निर्देश

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने सभी निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी और सहायक निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी को बूथ स्तर के कर्मचारियों के काम की प्रतिदिन समीक्षा करने का निर्देश दिया. उन्होंने आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने को भी कहा, ताकि पुनरीक्षण का काम तय समय-सीमा के भीतर पूरा किया जा सके.

उन्होंने कहा कि एसआईआर में एक भी पात्र भारतीय नागरिक का नाम नहीं छूटना चाहिए और कोई अपात्र अथवा विदेशी नागरिक मतदाता सूची में शामिल नहीं होना चाहिए. फॉर्म-6 के माध्यम से प्राप्त नए और युवा मतदाताओं के आवेदनों को समय पर दर्ज करने का निर्देश दिया गया है. साथ ही मतदान केंद्रों की दोबारा जांच और स्थल निरीक्षण कर अंतिम सूची तैयार करने को कहा गया है.

19 और 20 नवंबर को चलेगा मतदाता जागरूकता अभियान

19 और 20 नवंबर को मतदाता जागरूकता का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. स्कूल, कॉलेज और गांव स्तर पर युवाओं तथा पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने और मतदान के अधिकार के प्रति जागरूक किया जाएगा.

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By Avinash Singh

अविनाश कुमार सिंह प्रभात खबर के गढ़वा ब्यूरो चीफ हैं. वह आंचलिक से लेकर राज्य मुख्यालय तक 27 वर्ष से अधिक की पत्रकारिता का अनुभव रखते हैं. राजनीतिक विश्लेषण, क्राइम रिपोर्टिंग, हाई-प्रोफाइल इंटरव्यू और खोजी पत्रकारिता.में इन्हें महारत हासिल है. अविनाश कुमार सिंह झारखंड की पत्रकारिता और 'प्रभात खबर' के विश्वसनीय चेहरा हैं, जिन्होंने खबरों की गुणवत्ता को हमेशा प्राथमिकता दी है. लगभग तीन दशकों (27 वर्ष) के अपने लंबे सफर में उन्होंने पलामू ब्यूरो प्रमुख के रूप में 10 साल से अधिक समय तक नेतृत्व किया. इसके बाद प्रदेश मुख्यालय (रांची) में काम करते हुए, विशेषकर वर्ष 2024 के चुनावों के दौरान, उनके सटीक चुनावी विश्लेषण और राजनीतिक रिपोर्टिंग ने काफी प्रभाव छोड़ा.उनकी लेखनी का दायरा बेहद व्यापक है—संवेदनशील क्राइम रिपोर्टिंग से लेकर प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के इंटरव्यू तक, उनकी हर खबर चर्चा में रही है. पत्रकारिता के माध्यम से कई बड़े मामलों का उद्भेदन करना उनकी विशेष पहचान है.झारखंड राज्य गठन के बाद अविनाश ने पलामू में काम करते हुये राजनीतिक से जुड़ी कई ऐसी खबर को ब्रेक किया ,जिसका असर राज्य की राजनीतिक पड़ा .प्रयोगधर्मी पत्रकार के रूप में भी इनकी पहचान है .संस्थान के प्रति समर्पण के लिए उन्हें 'बेस्ट एम्प्लोयी' जैसे पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है. प्रभात खबर के संघर्ष से लेकर इसके विकास और उत्थान के सफर में अविनाश एक सक्रिय सहभागी और सहयात्री रहे हैं.

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