गौरव पांडेय की रिपोर्ट गढ़वा : गढ़वा जिले का श्री बंशीधर नगर न केवल श्री बंशीधर भगवान की अद्वितीय प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहाँ स्थित राजा पहाड़ी शिव मंदिर भी क्षेत्र की अपार जन-आस्था का मुख्य स्तंभ है .सावन के पवित्र महीने में इस मंदिर की महत्ता और प्राकृतिक छटा देखते ही बनती है . स्थानीय लोग और श्रद्धालु इसकी तुलना रांची के ऐतिहासिक व प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिर से करते हैं .
आइए जानते हैं कि सावन के दौरान राजा पहाड़ी शिव मंदिर इतना खास क्यों हो जाता है और क्यों त्रि-राज्यीय सीमा (बिहार, यूपी, छत्तीसगढ़) के शिवभक्त यहाँ खींचे चले आते हैं .
रांची के पहाड़ी मंदिर जैसी मान्यता
जिस प्रकार राजधानी रांची के पहाड़ी मंदिर की धार्मिक मान्यता उच्च शिखर पर है, ठीक उसी तरह गढ़वा के श्री बंशीधर नगर उंटारी स्थित राजा पहाड़ी शिव मंदिर की महिमा है . ऊंचे पहाड़ की चोटी पर विराजमान भोलेनाथ का यह दरबार स्थानीय लोगों के लिए अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है . मान्यता है कि सावन के महीने में यहाँ सच्चे मन से जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है .
प्राकृतिक सुंदरता और हरी-भरी वादियों का संगम
पहाड़ की चोटी पर स्थित होने के कारण वर्षा ऋतु और सावन के दौरान पूरा राजा पहाड़ी क्षेत्र हरियाली की चादर ओढ़ लेता है . चारों ओर फैली हरी-भरी वादियां, ऊंचे पेड़-पौधे और सुहावना मौसम यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को न केवल आध्यात्मिक शांति देता है, बल्कि एक अद्भुत प्राकृतिक अनुभूति भी कराता है . धार्मिक पर्यटन के दृष्टिकोण से भी यह स्थान बेहद आकर्षक है .
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पहाड़ी मंदिर का अनोखा परिसर
राजा पहाड़ी मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका अनोखा परिसर है .यहाँ भगवान शिव के प्राचीन मंदिर के साथ-साथ माता वैष्णो देवी की एक प्राकृतिक गुफा भी स्थित है . शिव और शक्ति का यह एक साथ संगम बेहद दुर्लभ माना जाता है . श्रद्धालु जब पहाड़ पर भोलेनाथ के दर्शन के लिए चढ़ते हैं, तो वे माता वैष्णो देवी की गुफा में प्रवेश कर माँ भगवती का भी आशीर्वाद प्राप्त करते हैं .
तीन पड़ोसी राज्यों का प्रमुख धार्मिक केंद्र
गढ़वा जिला भौगोलिक रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमाओं से सटा हुआ है . राजा पहाड़ी शिव मंदिर सावन के महीने में इन तीनों राज्यों के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन जाता है .सावन की सोमवारी पर अंतरराज्यीय सीमा पार कर हजारों की संख्या में भक्त यहाँ जलाभिषेक और विशेष अनुष्ठानों में भाग लेने पहुंचते हैं .
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मुख्य शहर से मात्र 500 मीटर की दूरी
आमतौर पर पहाड़ी मंदिर दुर्गम रास्तों पर होते हैं, लेकिन राजा पहाड़ी मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसकी सुगमता है . श्री बंशीधर नगर (नगर उंटारी) मुख्य शहर से यह मंदिर मात्र आधा किलोमीटर (500 मीटर) की दूरी पर स्थित है . आसान पहुंच मार्ग होने के कारण बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक, हर उम्र के श्रद्धालु सुलभता से पहाड़ पर पहुंचकर पूजन-अर्चन कर पाते हैं .
