गढ़वा : डंडई में महीनों से पशु अस्पताल पर ताला, इलाज के लिए भटक रहे पशुपालक

डंडई में सरकारी पशु चिकित्सालय महीनों से बंद है, जिससे बीमार मवेशियों के इलाज के लिए किसान परेशान हैं। जानें क्या है पूरा मामला और विभाग का क्या है जवाब।

रमेश कुमार विश्वकर्मा

डंडई (गढ़वा). डंडई में इंसानों के इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्र है, लेकिन हजारों किसान परिवारों की आजीविका का सहारा मवेशियों के इलाज के लिए सरकारी व्यवस्था महीनों से बंद है. प्रखंड मुख्यालय स्थित सरकारी पशु चिकित्सालय पर लंबे समय से ताला लटका हुआ है. इससे बीमार गाय, बैल, भैंस, बकरी और सूअर के इलाज के लिए पशुपालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. मवेशियों के बीमार होने पर ग्रामीणों को निजी चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ रहा है या उन्हें दूर-दराज के इलाकों में ले जाना पड़ रहा है. इससे इलाज का खर्च बढ़ गया है. समय पर इलाज नहीं मिलने से पशुओं की हालत बिगड़ने का खतरा भी बना रहता है.

किसानों के लिए बड़ी समस्या

डंडई प्रखंड में बड़ी संख्या में किसान खेती के साथ पशुपालन पर निर्भर हैं. किसी के लिए गाय और भैंस दूध की आमदनी का साधन हैं, तो कई किसानों के लिए बैल और दूसरे मवेशी खेती में मददगार हैं. ऐसे में सरकारी पशु चिकित्सालय का लंबे समय तक बंद रहना किसानों के लिए बड़ी समस्या बन गया है.

प्रभार के भरोसे चलती रही व्यवस्था, अब अस्पताल पर ताला

पशुपालकों के अनुसार डंडई पशु चिकित्सालय में लंबे समय से नियमित पशु चिकित्सक की व्यवस्था नहीं है. कुछ समय तक प्रभार के भरोसे अस्पताल की व्यवस्था चलती रही, लेकिन पिछले कई महीनों से अस्पताल पूरी तरह बंद है. ग्रामीणों का कहना है कि झंडोत्तोलन के दिन अस्पताल खुला था, लेकिन उसके बाद फिर ताला लग गया.

पशुपालन को बढ़ावा देने की बात लेकिन इलाज की सुविधा नहीं

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार पशुपालन को बढ़ावा देने की बात करती है, लेकिन पशु बीमार होने पर इलाज की सुविधा नहीं मिल रही है. समय पर इलाज नहीं होने से मामूली बीमारी भी गंभीर हो सकती है. वहीं पशु की मौत होने पर किसान परिवार को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है.

निजी इलाज से बढ़ा किसानों पर आर्थिक बोझ

सरकारी अस्पताल बंद होने से पशुपालकों को निजी स्तर पर डॉक्टर बुलाने या पशुओं को दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए अतिरिक्त पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं. छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह खर्च काफी भारी पड़ रहा है. ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों से अस्पताल का ताला खोलकर नियमित सेवा शुरू करने और स्थायी पशु चिकित्सक की व्यवस्था करने की मांग की है.

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जिले में पशु चिकित्सकों की कमी

पशुपालन पदाधिकारी श्रीकांत बरबुदे ने बताया कि जिले में पशु चिकित्सकों की भारी कमी है. उन्होंने कहा कि डंडई पशु चिकित्सालय के लिए एक पशु चिकित्सक को प्रभार देकर सप्ताह में दो दिन सेवा देने का निर्देश दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि बीमार पशुओं के संबंध में पशुपालक 1962 नंबर पर कॉल कर पशु चिकित्सा संबंधी सलाह भी ले सकते हैं. फिलहाल पशुपालकों को अस्पताल का ताला खुलने और नियमित इलाज की सुविधा बहाल होने का इंतजार है.

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By Prabhat khabar news desk

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