तस्करों के साथ बूढ़े या बीमार मवेशियों को बेचने वालों पर भी होगी कार्रवाई: एसडीएम

पशु तस्करी पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने तैयार की रणनीति

पशु तस्करी पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने तैयार की रणनीति प्रतिनिधि, गढ़वा सदर अनुमंडल क्षेत्र में पशु तस्करी और गोवंशीय पशुओं के अवैध परिवहन पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने रणनीति तैयार की है. सदर एसडीएम संजय कुमार ने गुरुवार शाम अधिकारियों के साथ बैठक में स्पष्ट किया कि पशु तस्करी में केवल तस्कर ही नहीं, बल्कि वे ग्रामीण भी दोषी हैं जो अपने बूढ़े या बीमार मवेशियों को चंद रुपयों के लालच में तस्करों के हवाले कर देते हैं. अब जांच अभियान के दौरान ऐसे लोगों को भी चिह्नित कर अधिनियम के तहत कार्रवाई की जायेगी. एसडीएम ने निर्देश दिया कि जो लोग यह जानते हुए भी कि उनके पशु बूचड़खाने भेजे जा सकते हैं, उन्हें तस्करों को बेचते हैं, उनसे जब्त किये गये पशुओं के रखरखाव और पुनर्वास का पूरा खर्च वसूला जायेगा. प्रशासन का मानना है कि जब तक आपूर्ति करने वाले ग्रामीणों पर लगाम नहीं लगेगी, तस्करी नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ना संभव नहीं है. समीक्षा बैठक में एसडीपीओ नीरज कुमार, जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. विद्या सागर सिंह, अंचलाधिकारी गढ़वा सफी आलम, अंचलाधिकारी मेराल यशवंत नायक, जिला पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रंजन कुमार झा, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी दीप श्री, पुलिस निरीक्षक सुनील तिवारी, मेराल के प्रभारी थाना प्रभारी और नगर प्रबंधक सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे . बाजार समिति में पशु तस्करी की पुष्टि एसडीएम संजय कुमार ने बताया कि उनके द्वारा पिछले दो दिनों में किये गये औचक निरीक्षण में बाजार समिति परिसर में अवैध पशु कारोबार की पुष्टि हुई है. इस लापरवाही पर बाजार समिति पणन सचिव से स्पष्टीकरण मांगा गया है. अब बाजार समिति में पशुओं की खरीद-बिक्री करने वाले किसानों का आधार कार्ड विवरण और रजिस्टर संधारित करना अनिवार्य होगा. बैठक में दिये गये महत्वपूर्ण निर्देशसर्च अभियान: नगर परिषद और थाना प्रभारी अपने क्षेत्रों में अवैध बूचड़खानों की गोपनीय जानकारी जुटाकर छापेमारी करेंगे . होटल-रेस्टोरेंट की जांच: प्रतिबंधित मांस की आशंका को लेकर संदिग्ध होटलों और रेस्टोरेंट में नियमित जांच होगी. पशु क्रूरता: गोवंश के अलावा अन्य जानवरों के प्रति क्रूरता बरतने वालों पर पशु क्रूरता अधिनियम 1960 के तहत कार्रवाई की जायेगी.

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By Akarsh aniket

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