1... चेकडैम तीन करोड़ का, फिर भी उद्देश्य से दूर

Published at :24 Nov 2015 6:46 PM (IST)
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1... चेकडैम तीन करोड़ का, फिर भी उद्देश्य से दूर

1… चेकडैम तीन करोड़ का, फिर भी उद्देश्य से दूरदो दशक से पेजयल की समस्या से जूझ रहे गढ़वा शहर के जलस्तर को ऊंचा करने के उद्देश्य से दानरो नदी पर कराया गया था चेकडैम का निर्माणशहर में सिवरेज की व्यवस्था नहीं होने केकारण पूरा गंदगी इसी डैम में जा रहा है24जीडब्ल्यूपीएच11- दानरो नदी पर […]

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1… चेकडैम तीन करोड़ का, फिर भी उद्देश्य से दूरदो दशक से पेजयल की समस्या से जूझ रहे गढ़वा शहर के जलस्तर को ऊंचा करने के उद्देश्य से दानरो नदी पर कराया गया था चेकडैम का निर्माणशहर में सिवरेज की व्यवस्था नहीं होने केकारण पूरा गंदगी इसी डैम में जा रहा है24जीडब्ल्यूपीएच11- दानरो नदी पर बना तीन करोड़ का चेकडैमप्रतिनिधि, गढ़वा. गढ़वा नगर पंचायत के प्रयास से सिंचाई विभाग द्वारा शहरी क्षेत्र में जलस्तर को ऊंचा करने के ख्याल से तीन वर्ष पूर्व दानरो नदी में बना तीन करोड़ रुपये का चेकडैम के निर्माण के औचित्य पर अब प्रश्न चिह्न लगने लगा है. शहर के नाली व शौचालय का पानी इस डैम में जाने से पानी काफी दूषित हो गया है. साथ ही कुछ लोगों द्वारा बार-बार डैम से पानी खोल दिये जाने से डैम में पानी भी नहीं रहता है. वर्तमान में मछली मारने के लिए कुछ लोगों द्वारा पानी में जहर डाल दिया गया, जिससे पानी जहरीला हो गया है. समाचार के अनुसार पांच साल के राजनीतिक उठा-पटक व आरोप-प्रत्यारोप के बीच तीन वर्ष पूर्व शहर के सोनपुरवा चिलिंग प्लांट के समीप तीन करोड़ की लागत से चेकडैम का निर्माण कराया गया था. इसके पूर्व चेकडैम के निर्माण स्थल को लेकर खूब राजनीति हुई थी. तत्कालीन नगर पंचायत अध्यक्ष अनिता दत्त सहिजना पीएचईडी घाट के समीप इसका निर्माण कराना चाहती थीं. लेकिन अंतत सोनपुरवा में ही इस चेकडैम का निर्माण हुआ. इसके निर्माण का उद्देश्य पिछले दो दशक से पानी के लिए जूझ रहे गढ़वा शहर में जलस्तर को ऊपर करना था, ताकि लोगों को पेजयल जैसी गंभीर समस्या से निजात मिल सके. लेकिन वर्तमान में चेकडैम का कोई लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है, क्योंकि बरसात के दिनों में दो से तीन माह तक ही इसमें पानी रहता है. साथ ही शहर के बीच से गुजरी सरस्वती नदी से कचरा व दूषित पानी इसी डैम में जाकर मिलता है. वर्तमान में इस डैम का पानी न तो जानवरों के पीने लायक है और न ही इंसाने के नहाने लायक है. ऐसे में सरकार द्वारा खर्च की गयी तीन करोड़ की राशि के औचित्य पर प्रश्नचिह्न लगना लाजिमी है.

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