चाकुलिया. ग्रामीण क्षेत्र के विकास व अर्थव्यवस्था मजबूत करने के लिए शुरू की गयी मनरेगा योजना चाकुलिया में दम तोड़ रही है. प्रखंड में बीते तीन महीने से मनरेगा मजदूरों को मजदूरी भुगतान नहीं किया गया है. वहीं, मनरेगा का काम देख रहे रोजगार सेवकों को चार माह से मानदेय नहीं मिला है. मनरेगा योजना में सामग्री सप्लाई करने वाले वेंडरों को लगभग एक वर्ष से भुगतान नहीं किया गया है. स्थिति यह है कि अब मनरेगा के काम में न मजदूर मिल रहे हैं, ना वेंडर सामग्री देना चाह रहे हैं. रोजगार सेवक पदाधिकारियों की डांट सुनकर परेशान हैं. विपरीत परिस्थिति में भी मनरेगा योजनाओं को पूर्ण कराने के लिए रोजगार सेवक कभी मनरेगा मजदूरों के हाथ पांव जोड़ रहे हैं, तो कभी वेंडरों के. नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ रोजगार सेवकों ने बताया कि ना उनका घर-परिवार चल पा रहा है, ना मनरेगा मजदूरों का.
मजदूरों का 1.87 करोड़ रुपये बकाया
चाकुलिया प्रखंड कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, 18 हजार 464 मजदूर दिवस का लगभग एक करोड़ 87 लाख 35 हजार 356 रुपये बकाया है. मनरेगा योजना में सामग्री सप्लाई करने वाले वेंडरों का 32 लाख 84 हजार रुपये बकाया है.फंड के अभाव में नहीं हो पा रहा भुगतान : बीपीओ
इस बारे में पूछे जाने पर बीपीओ लीला सोलंकी ने बताया कि फंड के अभाव में मनरेगा मजदूरों की मजदूरी का भुगतान नहीं हो पा रहा है. वेंडर का भुगतान नहीं हुआ है. वरीय पदाधिकारी को अवगत कराया गया है. फंड निर्गत होते ही राशि उपलब्ध करा दी जायेगी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
