East Singhbhum News : सिलिकोसिस जांच के नाम पर खिलवाड़ स्वास्थ्य मंत्री से स्पष्ट गाइडलाइन की मांग

जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और पीड़ित मजदूरों को मुआवजा दिलाने की उठायी मांग

घाटशिला. झारखंड के खनन और खनिज उद्योगों में काम करने वाले मजदूरों के बीच सिलिकोसिस रोग बढ़ रहे हैं. ऑक्यूपेशनल सेफ्टी एंड हेल्थ एसोसिएशन ऑफ झारखंड (ओशाज) ने इस गंभीर मुद्दे पर राज्य सरकार से स्पष्ट और मानक जांच पद्धति लागू करने की मांग की है. संगठन के महासचिव समित कुमार कर ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी को पत्र लिखकर सिलिकोसिस की जांच व निदान के लिए तत्काल सरकारी गाइडलाइन जारी करने का आग्रह किया है. पत्र में कहा गया कि झारखंड की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा खनन पर आधारित है, जहां मजदूर सिलिकोसिस और कोल वर्कर्स न्यूमोकॉनियोसिस जैसी फेफड़ों की जानलेवा बीमारियों का शिकार हो रहे हैं. बावजूद इसके, जांच की कोई स्पष्ट मानक प्रक्रिया तय नहीं होने के कारण पीड़ित मजदूरों को न तो समय पर इलाज मिल रहा है और न ही मुआवजा. समित कर ने बताया कि मुसाबनी, धालभूमगढ़ और गुड़ाबांदा जैसे क्षेत्रों के संदिग्ध मजदूरों के एक्स-रे रिपोर्ट अब तक लंबित हैं.

पूर्वी सिंहभूम में 1036 मामले, केवल 37 को मुआवजा मिला : संगठन ने चौंकाने वाला खुलासा किया कि पूर्वी सिंहभूम जिले में सिलिकोसिस के 1036 मामले सामने आये हैं, लेकिन अब तक केवल 37 पीड़ितों को ही मुआवजे का लाभ मिल सका है. आरोप है कि टीबी विभाग द्वारा मानवाधिकार आयोग को भ्रामक जानकारी देने से पीड़ितों के मुआवजे में बाधा उत्पन्न हो रही है. ओशाज ने मांग की है कि सर्वोच्च न्यायालय और मानवाधिकार आयोग के निर्देशों के अनुरूप जल्द से जल्द गाइडलाइन जारी की जाये, ताकि पीड़ित मजदूरों को न्याय और पुनर्वास मिल सके.

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Published by: Atul pathak

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