खास बातें
West Bengal Election 2026 Controversy: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की वोटिंग का दौर समाप्त हो चुका है. लेकिन विवादों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. ताजा विवाद बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं के ड्रेस कोड (Dress Code) को लेकर शुरू हुआ है.
टीएमसी ने चुनाव आयोग पर बोला हमला
सोशल मीडिया पर वायरल हुई कुछ खबरों के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आरोप लगाया कि कुछ मतदान केंद्रों पर बुजुर्ग मतदाताओं को विशेष तरह के कपड़े पहनकर आने या खास रंगों से परहेज करने का मौखिक निर्देश दिया गया. टीएमसी ने इसे मतदाताओं को डराने और उनकी स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करने की साजिश करार दिया.
क्या है विवाद की जड़?
विवाद की शुरुआत दक्षिण कोलकाता के कुछ मतदान केंद्रों से हुई, जहां कथित तौर पर पोलिंग अधिकारियों ने होम वोटिंग और बूथ पर आने वाले बुजुर्गों के पहनावे को लेकर कुछ टिप्पणियां की थी. टीएमसी का आरोप है कि भाजपा के इशारे पर कुछ अधिकारियों ने बुजुर्ग मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की. कुछ स्थानीय निवासियों ने कथित तौर पर शिकायत की कि उन्हें मतदान केंद्र के भीतर अपनी पसंद के पारंपरिक पहनावे (जैसे शॉल या गमछा) के लिए टोकने की कोशिश की गयी.
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चुनाव आयोग ने कहा- कोई ड्रेस कोड नहीं
मामले के तूल पकड़ते ही चुनाव आयोग (ECI) ने स्पष्टीकरण जारी किया. आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मतदाताओं के लिए कोई ‘ड्रेस कोड’ तय नहीं किया गया. नियम केवल इतना है कि मतदाता ऐसा कोई कपड़ा या चिह्न पहनकर न आये, जिससे किसी विशेष राजनीतिक दल का प्रचार होता हो (जैसे पार्टी का लोगो या झंडा).
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भाजपा बनाम टीएमसी
भाजपा ने इन आरोपों को टीएमसी की ‘झुंझलाहट’ बताया. भाजपा नेताओं ने कहा कि जब हार सामने दिखती है, तो टीएमसी ऐसे बेबुनियाद मुद्दे उठाती है. टीएमसी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर मांग की कि मतदान के दिन किसी भी मतदाता को उनके पहनावे के आधार पर वोट देने से न रोका जाये.
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West Bengal Election 2026 Controversy: काउंटिंग से पहले ‘ड्रेस कोड’ विवाद का तड़का
4 मई को होने वाली मतगणना से पहले इस ‘ड्रेस कोड’ विवाद ने बंगाल के चुनावी माहौल में एक नया तड़का लगा दिया है. हालांकि, प्रशासन का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है. मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ. मतगणना भी कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न होगी.
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