East Singhbhum News : रसोई गैस की किल्लत से ढाबे बंद मिट्टी के चूल्हे व कोयले की वापसी
गालूडीह. घाटशिला व आसपास के क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से रसोई गैस की भारी किल्लत हो गयी है. इसका सीधा और व्यापक असर अब छोटे-मझोले होटलों और दैनिक रेहड़ी-पटरी संचालकों पर दिखने लगा है. बुधवार को गैस सिलिंडर नहीं मिलने के कारण कई होटलों की भट्ठियां ठंडी रहीं. ग्राहकों को खाली हाथ लौटना पड़ा. अब होटल संचालकों ने पुराने ढर्रे पर लौटने का मन बना लिया है. बुधवार को कई दुकानों के बाहर होटल संचालक मिट्टी की भट्ठियां (चूल्हे) तैयार करने में लगे रहे. संचालकों का कहना है कि अब लकड़ी और कोयले के जुगाड़ के बिना होटल चलाना संभव नहीं रह गया है. हाइवे किनारे स्थित कई लाइन होटलों और ढाबों में भी अब फिर से कोयले का उपयोग शुरू हो गया है.
आशीर्वाद होटल में दोपहर से काम ठप, ग्राहक हुए निराश:
गालूडीह बस स्टैंड स्थित आशिर्वाद होटल के संचालक ने बताया कि सुबह तक काम जैसे-तैसे चला, लेकिन दोपहर होते ही कॉमर्शियल गैस खत्म हो गयी. इसके बाद न तो चाय बन सकी और न ही दोपहर का भोजन. आलू चॉप, समोसा और जलेबी जैसे पकवानों की कड़ाही भी नहीं चढ़ पायी. यात्री और स्थानीय ग्राहक को मायूस होकर वापस जाना पड़ा.
छोटे व्यापारियों पर रोजी-रोटी का संकट
यह संकट केवल बड़े होटलों तक सीमित नहीं है. ठेला लगाकर चाउमीन, डोसा, इडली, चाट और पकौड़ी बेचने वाले दुकानदार सबसे अधिक प्रभावित हैं. घरेलू और कॉमर्शियल दोनों ही तरह की गैस की बुकिंग के बावजूद सिलिंडर समय पर नहीं मिल पा रहे हैं. छोटे दुकानदारों का कहना है कि यदि वे महंगी गैस खरीदकर बेचेंगे, तो उनकी सारी कमाई गैस के बिल में ही चली जायेगी, जिससे परिवार का भरण-पोषण मुश्किल हो जाएगा.
घरेलू गैस : बुकिंग के बाद सप्ताह भर इंतजार
क्षेत्र में गैस की यह किल्लत समय के साथ और गहरी होने की आशंका जतायी जा रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि गैस एजेंसियों में बुकिंग के बावजूद हफ्तों इंतजार करना पड़ रहा है. यदि प्रशासन और संबंधित विभाग ने जल्द ही आपूर्ति सुचारू नहीं की, तो क्षेत्र के खाद्य व्यवसाय से जुड़े सैकड़ों लोगों के सामने बेरोजगारी की स्थिति उत्पन्न हो जायेगी.
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