East Singhbhum News : बहरागोड़ा वीणापाणी पाठागार की 90वीं वर्षगांठ 14 को, आजादी से पहले जली थी ज्ञान की लौ

फुटबॉल के क्षेत्र में बहरागोड़ा ने विशिष्ट पहचान बनायी

बहरागोड़ा. बहरागोड़ा क्षेत्र की बौद्धिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक वीणापाणी पाठागार 14 मार्च को अपने गौरवशाली 90 वर्ष पूरे करने जा रहा है. आजादी से पहले 14 मार्च, 1936 को स्थापित यह संस्थान आज भी खेलकूद, परंपरा और संस्कृति को सहेजने के अपने संकल्प पर अडिग है. दिलचस्प बात यह है कि इस पाठागार की स्थापना से ठीक 8 वर्ष पूर्व बहरागोड़ा उच्च विद्यालय बना था, जहां शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी था. ऐसे में इस पाठागार ने बांग्ला भाषा और संस्कृति को समृद्ध करने में ऐतिहासिक भूमिका निभायी.

नेताजी के भाषण से फुटबॉल के मैदान तक का गवाह :

जिस मैदान में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने भारत छोड़ने से पहले जनसभा को संबोधित किया था, उसी मैदान से पाठागार ने खेलकूद की गतिविधियां शुरू कीं. फुटबॉल के क्षेत्र में बहरागोड़ा ने विशिष्ट पहचान बनायी. वर्ष 2007 से जेएससीए के तत्वावधान में आयोजित विजय बोस क्रिकेट टूर्नामेंट का यह मैदान केंद्र बना, जो आज खिलाड़ियों का हृदय स्थल है.

1990 के बाद किताबों से दूरी बनाने लगे लोग, चढ़ रहीं दीमक की भेंट

संस्थान के इतिहास में 1936 से 1990 तक का समय स्वर्ण काल रहा, जब प्रतिदिन 200 से 250 किताबों की एंट्री होती थी. लोग घर ले जाकर किताबें पढ़ना अपनी दिनचर्या का हिस्सा मानते थे. 1990 के बाद युवा पीढ़ी की रुचि किताबों में घटने लगी. यहां रामायण, महाभारत, उपन्यास और कविता संग्रह जैसी 2500 से अधिक अनमोल किताबें मौजूद हैं, जिनमें से कई रखरखाव के अभाव में दीमक की भेंट चढ़ रही हैं.

– वीणापानी पाठागार का 90वां वर्ष पूरा होना एक बड़ा कीर्तिमान है. तकनीकी युग में युवाओं की रुचि भले ही किताबों में घटी हो, लेकिन हम क्रिकेट और फुटबॉल के माध्यम से उन्हें प्रेरित कर रहे हैं. हमारे पूर्वजों के संकल्प को बचाए रखना ही हमारा मुख्य लक्ष्य है. –

आफताब आलम और अशोक कर

, संयुक्त सचिव, वीणापाणी पाठागार.

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By ATUL PATHAK

ATUL PATHAK is a contributor at Prabhat Khabar.

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