रंजन
East Singhbhum (जादूगोड़ा): जादूगोड़ा और आसपास के टेलिंग पोंड क्षेत्र के विस्थापितों का आक्रोश एक बार फिर फूटा है. यूसिल प्रबंधन द्वारा वार्ता में सक्षम पदाधिकारी की अनुपस्थिति और बार-बार वादाखिलाफी से नाराज टेलिंग पोंड विस्थापित समिति एवं जोआर संगठन के सदस्यों ने 25 मार्च को प्रस्तावित बैठक का बहिष्कार कर दिया था. इसके विरोध में गुरुवार सुबह करीब 9 बजे से 10 बजे तक विस्थापितों ने टेलिंग पोंड की पाइपलाइन खोल दी, जिससे करीब एक घंटे तक कार्य पूरी तरह ठप रहा और मिल मे भी कार्य बाधित रहा. इस घटना से यूसिल प्रबंधन में हड़कंप मच गया.
1 अप्रैल को होगी बैठक
सूचना मिलने पर यूसिल अधिकारी महेश साहू मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन विस्थापित अपने मांगों पर अडिग रहे. बाद में महेश साहू द्वारा लिखित आश्वासन दिया गया कि 1 अप्रैल को यूसिल के नये भवन में त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित होगी, जिसमें पोटका के अंचलाधिकारी (CO) के नेतृत्व में बातचीत होगी. आश्वासन मिलने के बाद विस्थापितों ने आंदोलन स्थगित कर दिया और पाइपलाइन का कार्य पुनः शुरू हो सका.
9 मार्च को भी विस्थापितों ने किया था प्रदर्शन
विस्थापित नेता घनश्याम विरुली ने चेतावनी दी कि यदि 1 अप्रैल की वार्ता में ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा. उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल होकर यूसिल के कार्य को पूरी तरह ठप कर देंगे और रियर गेट सहित अन्य गतिविधियों को भी बाधित किया जाएगा. इससे पहले 9 मार्च को भी विस्थापितों ने 12 घंटे तक यूसिल के रियर गेट को जाम किया था. उस समय प्रबंधन ने सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया था, लेकिन 25 मार्च की बैठक में न तो सक्षम अधिकारी मौजूद थे और न ही जिला प्रशासन के प्रतिनिधि, जिससे नाराज होकर विस्थापितों ने बहिष्कार कर दिया.
काफी संख्या में ग्रामीण थे मौजूद
विस्थापितों की प्रमुख मांगों में बिना अधिग्रहण डूबाई गई जमीन का मुआवजा और नौकरी, सूचीबद्ध विस्थापितों की बहाली, मृत कर्मचारियों के आश्रितों को नौकरी, चाटीकोचा स्थित सारना स्थल की सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण, खराब चापाकलों की मरम्मत तथा स्थानीय युवाओं को रोजगार शामिल है. इसके अलावा विस्थापितों का आरोप है कि टेलिंग पोंड के दूषित पानी से धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंच रहा है और क्षेत्र में रेडिएशन युक्त धूल से स्वास्थ्य पर खतरा बना हुआ है. आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे, जिससे क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही.
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