गालूडीह.गालूडीह के पुतड़ू गांव स्थित पल्लीश्री कुटीर में शनिवार से शुरू बंगाली समाज का दो दिवसीय बसंत उत्सव का रविवार को रंगारंग कार्यक्रम के साथ समापन हुआ. समापन समारोह में संगीत, नृत्य, आवृत्ति, श्रुति नाटक आदि प्रस्तुत किये गये. कार्यक्रम में जमशेदपुर समेत आस पास के विभिन्न स्थानों से बंगाली समाज के करीब 200 लोग शामिल हुए. बसंत उत्सव में महिलाएं पीली साड़ी और पुरुष पंजाबी कुर्ता पोशाक में पहनकर भाग लिये. इस दौरान पूरे बंगाली कल्चर को आत्मसात किया गया. इस दौरान बांग्ला संगीत “आमार मोन भालो ना, कालार साथे प्रेम कोरे सुख होलो ना ” गीत पर उपस्थित बंगाली समाज के लोग झूम उठे. इस गीत ने सभी का मन मोह लिया. कार्यक्रम का आयोजन भूषण चंद्र गोप और उनकी पत्नी नियति गोप ने किया.
उत्सव में महिलाओं ने एक-दूसरे को गुलाल लगाया
कार्यक्रम के अंत में महिलाओं ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर बसंत उत्सव की शुभकामनाएं दीं. महिलाएं माथे पर पलाश का फूल जुड़े में लगायीं. पहले दिन शनिवार को बंसत उत्सव की शुरूआत अल्पना प्रतियोगिता से हुई थी, जिसमें पुतड़ू, पायरगुड़ी और दारीसाई गांव में अल्पना प्रतियोगिता आयोजित की गयी. विजेता को पुरस्कृत भी किया गया.बंगाली संस्कृति की अपनी पहचान
नियति और भूषण ने बताया कि यहां प्रति वर्ष इस बसंत उत्सव मनाया जाता है. बंगाली संस्कृति की अपनी पहचान है, जिसे सहेज कर रखना जरूरी है. इस अवसर पर बंगाल समाज की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ नृत्य-संगीत आयोजित किए गये. रवींद्र संगीत की धुन बजायी गयी. सभी में बसंत उत्सव का उत्साह दिखा.मंच का संचालन कृष्णा साहू ने किया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
