गालूडीह : झारखंड, बंगाल, ओड़िशा बॉर्डर रिजनल कमेटी के सचिव रहे प्रमुख नक्सली नेता कान्हू मुंडा उर्फ अर्जुन मुंडा के सरेंडर करने के छह माह बाद उसकी भतीजी रानी उर्फ पूजा मुंडा ने भी बंगाल के पुरुलिया एसपी के समक्ष सरेंडर कर नक्सली संगठन को अलविदा कह दिया. नक्सली चाचा कान्हू मुंडा ने झारखंड में […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
गालूडीह : झारखंड, बंगाल, ओड़िशा बॉर्डर रिजनल कमेटी के सचिव रहे प्रमुख नक्सली नेता कान्हू मुंडा उर्फ अर्जुन मुंडा के सरेंडर करने के छह माह बाद उसकी भतीजी रानी उर्फ पूजा मुंडा ने भी बंगाल के पुरुलिया एसपी के समक्ष सरेंडर कर नक्सली संगठन को अलविदा कह दिया. नक्सली चाचा कान्हू मुंडा ने झारखंड में पूर्वी सिंहभूम एसपी के समक्ष सरेंडर किया तो उसकी नक्सली भतीजी रानी मुंडा बंगाल पुरूलिया एसपी के समक्ष सरेंडर किया. कान्हू मुंडा सरेंडर के बाद छह माह से घाटशिला जेल में बंद है.
वहीं रानी मुंडा के सरेंडर करने के बाद पुलिस ने उसे पुरुलिया ट्रांजिट कैंप में भेज दिया. पुरुलिया के एसपी जय विश्वास ने कहा कि सरेंडर करने वाले रानी मुंडा और हाजारी हेंब्रम ट्रांजिट कैंप में रहेंगे. कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दोनों को होम गार्ड की नौकरी दी जायेगी. इसके अलावे बंगाल के सरेंडर पॉलिसी के तहत जो लाभ मिलना है दोनों को मिलेगा. दोनों मुख्यधारा से जुड़ें है सरकारी सुविधा दोनों को सरकारी प्रावधान के तहत मुहैया कराया जायेगा.
बंगाल पुलिस की टीम सरेंडर को लेकर थी प्रयासरत: खबर है कि बंगाल पुलिस की एक विशेष टीम दलमा स्क्वायड में शामिल नक्सलियों के सरेंडर कराने को लेकर काफी दिनों से प्रयासरत थी. खबर तो यहां तक है कि सप्ताह भर पूर्व रानी मुंडा और हाजारी हेंब्रम से दलमा क्षेत्र में बंगाल पुलिस ने संपर्क कर दोनों को सरेंडर के लिए राजी कराया और साथ लेकर पुरुलिया चली गयी.
कौन है रानी मुंडा: सरेंडर करने वाली रानी मुंडा का घर गुड़ाबांदा के जियान टोला के हडि़यान में हैं. वह कान्हू मंुडा की भतीजी है. वह 2005 में संगठन में शामिल हुई थी. पहले गुड़ाबांदा दस्ते में रही, फिर दामपाड़ा और वर्तमान में दलमा दस्ते में कार्यरत थी. उसके खिलाफ पांच मामले दर्ज है.